ढैंचा व मूंग के बीज का शुरू किया गया वितरण
लखीसराय : कृषि विभाग द्वारा हरी खाद चादर योजना अंतर्गत किसानों के बीच ढैंचा ,मूंग बीज का वितरण प्रारंभ हो गया. परंतु पानी के अभाव में दोनों फसल की बुआई असंभव प्रतीत हो रहा है.जिले के सात प्रखंडों के बड़हिया, पिपरिया, सूर्यगढ़ा, रामगढ़, चानन व हलसी में प्रखंड कृषि भवन में हरी खाद्य चादर योजना […]
लखीसराय : कृषि विभाग द्वारा हरी खाद चादर योजना अंतर्गत किसानों के बीच ढैंचा ,मूंग बीज का वितरण प्रारंभ हो गया. परंतु पानी के अभाव में दोनों फसल की बुआई असंभव प्रतीत हो रहा है.जिले के सात प्रखंडों के बड़हिया, पिपरिया, सूर्यगढ़ा, रामगढ़, चानन व हलसी में प्रखंड कृषि भवन में
हरी खाद्य चादर योजना बंतर्गत शिविर आयोजित कर किसानों के बीच ढैंचा व मूंग का वितरण प्रखंड कृषि पदाधिकरियों व कृषि समन्यव्यकों के द्वारा अपने अपने प्रखंड क्षेत्र में वितरण प्रारंभ कर दिया गया. हालांकि बड़हिया व पिपरिया प्रखंड में 24 अप्रैल को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर शिविर बाधित हो रहा है.
ढैंचा क्या है
हरी खाद्य के अतंर्गत ढैंचा खेत में खाद का काम करता है.ढैंचा बुआई के 35 दिनों के बाद खेत की जुताई कर देने से खेतों की उर्वरक शक्ति तो बढ़ती ही है ,नाइट्रोजन की भरपाई भी करती हैं. जिससे खर पतवार व खेत में दरार कम होता हैं.जिसको लेकर सरकार के द्वारा प्रति वर्ष ढैंचा ,मूंग का वितरण किया जाता है.
पानी के अभाव में बुआई असंभव – अगर इंद्र भगवान हल्की बारिश नहीं दी तो दो फसलों की बुआई नहीं हो पायेगी. जिससे किसानों की समस्या उत्पन्न हो जायेगी. हालांकि पटवन के माध्यम से दोनों फसलों की बुआई की जा सकती है.
बोले पदाधिकारी
प्रखंड कृषि पदाधिकारी बधर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि ढैंचा किसानों के लिये काफी उपयोगी हैं.थोड़ा पानी के बाद ढैंचा बीज को खेत में छींट दें. 30 से 35 दिनों के बाद जुताई कर देने से खेत में नाइट्रोजन के साथ उर्वरक शक्ति बढ़ा देती है और खेतों में दरार व खर पतवार नाम मात्र के होते हैं. इसे हर किसानों को अपने खेत में उपयोग करना चाहिये.