मुंगेर : बारहों मास में सर्वोत्तम कार्तिक के दूसरी एकादशी का महात्म्य किसी भी व्रत त्योहार से कम नहीं. इस दिन प्राचीन मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु चार महीने के उपरांत जागते हैं. तभी सृष्टि का कल्याण होने लगता है. भक्त जन पवित्र स्नान-दान करने के बाद सूर्यास्त तक उपवास रखा.
अहले सुबह रविवार को सूर्योदय पूर्व से ही नगर तथा आसपास के श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए मुंगेर के विभिन्न घाटों पर बड़ी संख्या में स्नान करने पहुंचने लगे. दिन चढ़े देर तक घाटों पर एकत्र दीन-हीन भिखाडि़यों को तथा पूजनोपरांत मंदिर के पुजारियों को अन्न-वस्त्र-फल-द्रव्य दान कर पुण्य के भागी बने. बाजारों में फल एवं पूजन सामग्रियों की खरीदारी करने वालों से अच्छी चहल पहल बनी रही. घरों में लोगों ने विष्णु पुराण कथा एवं सत्य नारायण की पूजा की.
उपासकों ने सूर्यास्त के उपरांत फलाहार लिया. पौराणिक मान्यता के अनुसार देव प्रबोधनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही प्रकृति में नवीन चेतना आ जाती है. वन और उद्यान निखरने लगते हैं. साथ ही यह दिन शुभ कार्यों के लिए अत्यधिक उत्तम माना जाता है. शादी विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य इस दिन काफी संख्या में होने लगे.
विष्णु पत्नी लक्ष्मी तुलसी रूप में युगों से पूजित हैं. महिलाओं ने तुलसी के गमलों के श्रृंगार कर सिंदूर, रोली,अक्षत से उनकी पूजा की तथा दिया जला कर तुलसी जी की आरती परिजनों केक साथ गाया.
