फिर शुरू होगी लाली पहाड़ी की खुदाई

लखीसराय : जिले के प्रसिद्ध लाली पहाड़ी के तीसरे चरण की खुदाई के लिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) ने बुधवार को आदेश जारी कर दिया है. इस संबंध में एएसआई के अन्वेषण एवं खुदाई विभाग के निदेशक वीएन प्रभाकर ने बुधवार 23 अक्तूबर को बिहार सरकार के युवा कला एवं संस्कृति विभाग के लिए […]

लखीसराय : जिले के प्रसिद्ध लाली पहाड़ी के तीसरे चरण की खुदाई के लिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) ने बुधवार को आदेश जारी कर दिया है. इस संबंध में एएसआई के अन्वेषण एवं खुदाई विभाग के निदेशक वीएन प्रभाकर ने बुधवार 23 अक्तूबर को बिहार सरकार के युवा कला एवं संस्कृति विभाग के लिए बिहार बिहार विरासत विकास समिति को पत्र भेजकर कहा है कि सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ ऑर्कियोलॉजी ने सीजन 2019-20 के लिए लाली पहाड़ी के खुदाई कराने का निर्णय लिया है,

जिसके लिए विश्व भारती शांति निकेतन विश्वविद्यालय पश्चिम बंगाल के पुरातत्व विभाग के साथ कार्य करने को कहा गया है, जिसके निदेशक होंगे विश्वविद्यालय के संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष डा अनिल कुमार. जिसकी एक प्रतिलिपि डा अनिल कुमार को भी प्रेषित किया है. इस संबंध में डा कुमार ने बताया कि एएसआइ के द्वारा बिहार सरकार को पत्र भेजा गया है, जिसके बाद बिहार सरकार के द्वारा लाइसेंस निर्गत करने के उपरांत खुदाई कार्य प्रारंभ किया जायेगा.
यहां बता दें कि लाली पहाड़ी के गर्भ में बौद्ध महाविहार होने की संभावना जताये जाने के बाद सरकार ने इसके उत्खनन का आदेश दिया गया था, जिसके तहत बिहार विरासत विकास समिति के निदेशक विजय चौधरी एवं डॉ अनिल कुमार की देखरेख में खुदाई कार्य प्रारंभ किया गया, जिसका शुभारंभ स्वयं बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार ने पटना से सीधे हेलीकॉप्टर से लाली पहाड़ी पहुंच 25 नवंबर 2017 को किया था. जिसके बाद अबतक दो चरणों की खुदाई में बौद्ध महाविहार में रहने के लिए बनाये गए बौद्ध भिक्षुओं के कक्ष सहित सुरक्षा टावर, अनेकों भग्नावशेषों, खंडित मूर्तियां, पुरातात्विक अवशेष बरामद हो चुकी हैं, जिससे पुरातनकाल की सभ्यताओं का भी पता चलता है.
इसके साथ ही यहां मिले अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम महाप्रणाल भी खुदाई के प्रथम चरण में मिला था जिसका अवलोकन कर स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आश्चर्यचकित हुए थे, इसके साथ ही द्वितीय चरण की खुदाई के दौरान लकड़ी के मिले वोटिव ने तो पूरे विश्व में मिले बौद्ध अवशेषों से अलग साबित किया. जिसके बारे में कहा गया था कि विश्व में सिर्फ लाली पहाड़ी की खुदाई के दौरान यह मिला, जबकि अबतक सिर्फ पत्थर या मिट्टी के ही वोटिव मिले थे.
तीसरे चरण की खुदाई के निकलेगा विस्तृत स्वरूप : जानकारों की मानें तो दो चरणों की खुदाई के बाद लाली पहाड़ी पर बौद्ध महाविहार होने की सारी बातें सामने आ ही चुकी हैं, और अब तीसरे चरण की खुदाई के उपरांत इसका विस्तृत स्वरूप सामने आ जायेगा. तब यह पूरे विश्व के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करेगा, जिससे लखीसराय के उत्तरोत्तर विकास की पूरी संभावनाएं परिलक्षित होती दिखेगी.

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