तात्कालीन प्रधानाध्यापक हेमंत बाबू ने रुईधासा काली मंदिर में लिखी धर्मग्रन्थ की किताब किशनगंज किशनगंज शहर के रूईधासा काली मंदिर में 51 वर्षो से मां काली की पूजा की जा रही है. यहां वर्ष 1970 में मां काली की पूजा शुरू की गई थी. उस समय यहां हर तरफ जंगल ही जंगल था. यहां दिन में भी कोई जाने से डरता था. ऐसे में इंटर हाई स्कूल के तात्कालीन उप प्राचार्य शेलेन्द्र नाथ भट्टाचार्य के मन में यहां पूजा शुरू करने का विचार आया. कमेटी के पूर्व संरक्षक सह सेवानिवृत्त शिक्षक सुजय दास ने कहा कि उस समय स्वर्गीय शैलेन्द्र नाथ भट्टाचार्य के मन में यहां पूजा शुरू करने का विचार आया. तब सुजय दास के पिता नगेन्द्र मोहन दास, मारवाड़ी कॉलेज के तात्कालीन प्राचार्य स्वर्गीय अभय कृष्ण प्रसाद, स्वर्गीय कमल सरकार, मोहनी मोहन दास, देवेंद्र दास, अमल दास, हरीश चन्द्र दास ने एक जुट होकर आपसी सहयोग से पूजा शुरू करवायी. शुरूआत में नरेंद्र मोहन दास वहां हर वर्ष प्रतिमा देने लगे. बाद में समाज के लोगों के सहयोग से प्रतिमा दी जाने लगी. उस समय स्वर्गीय ऋषिकेश चक्रवर्ती पुरोहित का कार्य करते थे. इसके बाद गौड़ चक्रवर्ती पुरोहित हुए. वर्तमान में प्रभात चक्रवर्ती पुरोहित हैं. उस समय पास से मिट्टी लाकर माता की वेदी बनायी जाती थी. पूजा में पंडाल के लिए घर की साड़ी से डेकोरेशन किया जाता था. पूजा में महिलाएं भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती थी. कहते है कि यह स्थल इतना जागृत था कि उस जमाने में इंटर हाई स्कूल के तात्कालीन प्रधानाध्यापक हेमंत बाबू ने उक्त स्थल में धर्मग्रन्थ की किताब भी लिखी थी. शैलेन्द्र नाथ भट्टाचार्य उस समय उस स्कूल में उप प्राचार्य थे. उन्हें यह मालूम था की यह स्थान इतना पवित्र है कि यहां धार्मिक किताब लिखी गई है. तभी से यहां पूजा होने लगी. धीरे-धीरे वर्ष 1975 के बाद यहां पक्के के मंदिर का निर्माण शुरू हुआ. बाद में विधान पार्षद डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के सहयोग से मंदिर निर्माण पूरा किया गया. संरक्षक श्यामल दास,अध्यक्ष निताई चक्रवर्ती, सचिव नितेन प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2020 से यहां माता की प्रतिमा पूरे वर्ष तक स्थापित रहती है. इस मंदिर में भक्तों की अटूट आस्था है. यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ वापस नहीं लौटता है.
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