ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट.
Wife Donat Kidney: जिंदगी के सबसे कठिन मोड़ पर जब डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि अब किडनी प्रत्यारोपण ही जीवन बचाने का एकमात्र रास्ता है, तब ठाकुरगंज की सविता देवी ने ऐसा फैसला लिया, जिसने पूरे सीमांचल को भावुक कर दिया. उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा- “मेरी किडनी ले लीजिए.” यह सिर्फ एक चिकित्सकीय निर्णय नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग और अटूट विश्वास की ऐसी मिसाल है, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है.
पूर्व उप मुख्य पार्षद की दोनों किडनियां हुईं खराब
ठाकुरगंज नगर पंचायत के पूर्व उप मुख्य पार्षद कृष्ण कुमार सिंह पिछले कुछ समय से गंभीर किडनी रोग से जूझ रहे हैं. लगातार इलाज और चिकित्सकीय निगरानी के बावजूद उनकी सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. आखिरकार चिकित्सकों ने परिवार को बताया कि उनकी दोनों किडनियां गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और अब किडनी ट्रांसप्लांट ही उनकी जिंदगी बचा सकता है.
डॉक्टरों की यह बात सुनते ही परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. हर किसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपयुक्त डोनर की थी. लेकिन इसी बीच उनकी पत्नी सविता देवी ने स्वयं आगे आकर अपनी एक किडनी दान करने का निर्णय ले लिया.
37 वर्षीय सविता देवी बनीं उम्मीद की किरण
37 वर्षीय सविता देवी का यह फैसला आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. लोगों का कहना है कि आज के दौर में जहां रिश्तों में स्वार्थ की बातें अक्सर सुनने को मिलती हैं, वहां सविता देवी ने अपने त्याग से रिश्तों का वास्तविक अर्थ समझाया है.
जानकारी के अनुसार, डोनर और मरीज की चिकित्सकीय जांच, टिश्यू मैचिंग और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं. सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चंडीगढ़ के एक निजी अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण किया जाएगा. चिकित्सकों को उम्मीद है कि ऑपरेशन सफल होने के बाद कृष्ण कुमार सिंह सामान्य जीवन जी सकेंगे.
पूरे सीमांचल से मिल रही दुआएं
इस खबर के सामने आने के बाद ठाकुरगंज सहित पूरे सीमांचल से दंपती के लिए दुआओं का सिलसिला शुरू हो गया है. मुख्य पार्षद सिकंदर पटेल ने कहा कि सविता देवी का यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायक है. वहीं उप मुख्य पार्षद प्रतिभा देवी सहित कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दंपती के साहस को सलाम किया है.
यह केवल किडनी दान की खबर नहीं, बल्कि उस प्रेम की कहानी है, जिसने मुश्किल वक्त में हार मानने के बजाय जिंदगी को चुनने का फैसला किया.
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