झिझक छोड़कर जब मंच पर उतरे ग्रामीण बच्चे, तो तालियों से गूंज उठी शाम

ठाकुरगंज में स्वतंत्रता दिवस पर ग्रामीण बच्चों ने मंच पर अपनी छिपी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया. 'मैं हूं हिंदुस्तान' जैसे देशभक्ति गीतों और सामाजिक कुरीतियों पर आधारित प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. वर्षों पुरानी यह पहल आज एक वटवृक्ष बन गई है.

ठाकुरगंज में स्वतंत्रता दिवस की शाम एक अद्भुत और भावुक नजारा देखने को मिला. जिन ग्रामीण बच्चों के लिए कभी मंच पर कदम रखना या दर्शकों के सामने अपनी आवाज तक निकालना मुश्किल होता था, उन्होंने मंच पर उतरते ही अपनी प्रतिभा का ऐसा जलवा बिखेरा कि तालियों की गड़गड़ाहट रुकने का नाम नहीं ले रही थी. बच्चों के चेहरों पर आत्मविश्वास, आंखों में चमक और कदमों में उत्साह साफ झलक रहा था. ग्रामीण बच्चों की प्रतिभा को निखारने की वर्षों पुरानी यह पहल इस बार भावनाओं, देशभक्ति और सांस्कृतिक रंगों से पूरी तरह सराबोर नजर आई.

'मैं हूं हिंदुस्तान' और राजवंशी लोकगीत ने बांधा समां

दीप प्रज्वलन के साथ ही जैसे ही सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ, मंच मानो एक 'छोटे से हिंदुस्तान' में तब्दील हो गया. कार्यक्रम की रूपरेखा में कुल 34 मनमोहक प्रस्तुतियां शामिल थीं, जिन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.

  • देशभक्ति का जोश: 'मैं हूं हिंदुस्तान' और 'रंग दे बसंती' जैसे गीतों पर हुई प्रस्तुतियों ने उपस्थित युवाओं और बच्चों के भीतर गजब का जोश भर दिया.
  • मिट्टी की खुशबू: मध्य विद्यालय बौरीगछ के बच्चों ने पारंपरिक 'राजवंशी लोकगीत' के जरिए अपनी स्थानीय मिट्टी की खुशबू मंच तक पहुंचाई.
  • संस्कृति की छटा: उत्क्रमित मध्य विद्यालय लोधा के बच्चों ने शानदार कल्चरल डांस कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. इसके बाद 'जिस देश में गंगा बहता है' और 'माई तेरी चुनरिया लहराए' जैसी प्रस्तुतियों ने माहौल को भावुक कर दिया.
उपस्थित भीड़ | Prabhat Khabar Network

अन्य प्रमुख प्रस्तुतियां:

  • रिंकी डांस एकेडमी: 'आर्मी मिक्स'
  • सूबा बाई कन्या मध्य विद्यालय: 'मेरे भारत की बेटी'
  • आनंद मार्ग जागृति स्कूल: 'जय भारती'

इतिहास हुआ जीवंत, कुरीतियों पर किया गया प्रहार

मंच पर न केवल देशभक्ति का रंग दिखा, बल्कि इतिहास भी जीवंत हो उठा. बच्चों ने 'गांधी मार्च' और 'दांडी मार्च' के जरिए स्वतंत्रता संघर्ष की गौरवशाली झलक पेश की.

वहीं, मनोरंजन के बीच समाज को आईना दिखाने का भी काम किया गया. बाल विवाह और एसिड अटैक जैसे गंभीर और संवेदनशील विषयों पर आधारित प्रस्तुतियों ने लोगों को झकझोर कर रख दिया. इसके अलावा 'झिझिया बिहार', 'शिव तांडव', 'हिमालय की चोटियों से', 'भारत ही रहना चाहिए' और 'नया भारत का चेहरा' जैसी प्रस्तुतियों ने मंच को भावनाओं के अलग-अलग रंगों से भर दिया.

2005 में बोया गया था बीज, आज बन गया वटवृक्ष

इस भव्य मंच के पीछे सिर्फ एक दिन की मेहनत नहीं, बल्कि वर्षों का कड़ा सफर छिपा है.

कार्यक्रम के समापन पर ठाकुरगंज के विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने बताया कि ग्रामीण बच्चों को मंच देने की यह अनूठी पहल वर्ष 2005 में शुरू की गई थी. उस समय बच्चों में काफी झिझक हुआ करती थी और कई बच्चे घबराहट में बीच में ही कार्यक्रम छोड़ देते थे. वर्ष 2006 में इस आयोजन को एक व्यवस्थित स्वरूप दिया गया. धीरे-धीरे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा और आज स्थिति यह है कि बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता और पूरा परिवार भी उसी उत्साह के साथ इस आयोजन से जुड़ रहा है.

विधायक ने कार्यक्रम से जुड़े युवाओं का आभार जताते हुए कहा कि आने वाले समय में इसे और भी बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा. साथ ही, उन्होंने लोगों से सुझाव मांगते हुए ग्रामीण विकास और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में काम करने का संकल्प दोहराया.

गांधी मैदान में प्रदर्शन करते स्कूली बच्चे

कार्यक्रम को सफल बनाने वाले प्रमुख चेहरे

स्वतंत्रता दिवस की इस शाम को ऐतिहासिक और सफल बनाने में कई लोगों ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई.

  • सक्रिय सहयोगी: कन्हैया महतो, अमित सिन्हा, अमरजीत चौधरी, शांतनु मंडल, रोहित जायसवाल, बिट्टू साह, परमजीत मंडल, अरूप कुंडू, और संजय सिन्हा.
  • मंच संचालन: कार्यक्रम का शानदार और ऊर्जावान संचालन उद्घोषक जयदीप बनर्जी ने किया.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >