भारत-नेपाल सीमा से सटा है गांव, प्रखंड मुख्यालय से 40 किमी की है दूरी
बाड़ीजमीन गांव की भौगोलिक स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यह भारत-नेपाल सीमा के ‘नो-मेंस लैंड’ से महज चालीस फीट अंदर बसा हुआ है. सीमा पर होने के बावजूद यह कच्ची सड़क गांव के विकास के आड़े आ रही है और यहाँ के लोग विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर हैं.
गांव से प्रखंड मुख्यालय की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है. सड़क की बदहाली का आलम यह है कि सामान्य दिनों में भी राहगीरों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली छात्रों, गर्भवती महिलाओं, गंभीर मरीजों और बुजुर्गों को उठानी पड़ती है.
बरसात में कीचड़ का टापू बन जाती है कच्ची सड़क, डेढ़ किमी पैदल ढोना पड़ता है मरीज
स्थानीय ग्रामीण तरुण कुमार सिंह और कुशल कुमार सिंह के मुताबिक, बरसात के दिनों में यह कच्ची सड़क पूरी तरह से दलदल और कीचड़ में तब्दील हो जाती है. स्थिति इतनी विकट हो जाती है कि पैदल चलना तो दूर, साइकिल या मोटरसाइकिल से भी गांव में प्रवेश करना पूरी तरह दूभर हो जाता है.
आपातकालीन स्थिति में यदि कोई बीमार पड़ जाए, तो मरीज को खाट या डोली के सहारे किसी प्रकार एक से डेढ़ किलोमीटर दूर पहले निकटतम कद्दूभिट्ठा बाजार लेकर जाना पड़ता है, फिर वहां से एंबुलेंस के जरिए मुख्य अस्पताल भेजा जाता है. ग्रामीणों ने बताया कि करीब एक से डेढ़ वर्ष पूर्व मनरेगा योजना के तहत इस सड़क पर मिट्टीकरण का कार्य और तीन छोटे-छोटे कल्वर्ट (पुलिया) का निर्माण जरूर किया गया था, लेकिन सड़क के पक्कीकरण का कार्य अधर में लटके होने के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है. ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की घोर उपेक्षा के कारण आजादी के सात दशक बाद भी वे लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं.
सड़क के अभाव में रास्ते में ही दम तोड़ चुकी है महिला मरीज
वार्ड सदस्य प्रतिनिधि गोपाल प्रसाद सिंह ने एक दर्दनाक वाकये को याद करते हुए बताया कि सड़क न होने का खामियाजा गांव के लोग प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अपनी जान देकर भुगत रहे हैं.
कुछ वर्ष पूर्व बरसात के दिनों में गांव की एक महिला अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गई थी. सड़क पूरी तरह कीचड़ में डूबी होने के कारण उसे समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका. अंततः एंबुलेंस तक पहुंचने से पहले ही रास्ते में तड़प-तड़पकर उस महिला ने दम तोड़ दिया था. इस घटना के बाद भी व्यवस्था की नींद नहीं खुली.
सांसद से लेकर डीएम तक लगाई गुहार, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
वार्ड सदस्य प्रतिनिधि और ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि वे इस सड़क के निर्माण के लिए स्थानीय सांसद, पूर्व विधायक, वर्तमान विधायक से लेकर पूर्व में जिलाधिकारी तक कई बार लिखित अर्जी लगा चुके हैं. गुहार लगाने और सिर्फ आश्वासन मिलने का यह सिलसिला सालों से जारी है, लेकिन धरातल पर अब तक सड़क निर्माण की दिशा में कोई भी सकारात्मक पहल होती हुई दिखाई नहीं दे रही है.
सीमा सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर बसे इस गांव के ग्रामीणों ने अब प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी इस बुनियादी समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे लोग वोट बहिष्कार और उग्र आंदोलन का रास्ता अख्तियार करने पर मजबूर हो जाएंगे.
विधायक ने सड़क निर्माण विभाग से की अनुशंसा, पोर्टल पर अपलोड हुआ आईडी
इस पूरे मामले पर स्थानीय विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने संज्ञान लेते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बताया कि बाड़ीजमीन गांव की कच्ची सड़क के पक्कीकरण को लेकर उनके स्तर से जिला संचालन समिति और ग्रामीण कार्य विभाग पथ प्रमंडल टू किशनगंज को आधिकारिक अनुशंसा भेज दी गई है.
सड़क निर्माण की इस योजना का आईडी भी विभागीय पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपलोड हो चुका है. विधायक ने आश्वासन दिया है कि राज्य मुख्यालय से बजट और राशि आवंटित होते ही इस सीमावर्ती सड़क का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर प्रारंभ करा दिया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को हमेशा के लिए इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी.
पौआखाली (किशनगंज) से रणविजय की रिपोर्ट:
