पटरी बिहार की, ठहराव दूसरे राज्य में ; किशनगंज से बिना रुके निकल जाती है वंदे भारत स्लीपर, स्टॉपेज के इंतजार में सीमांचल

देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बिहार के किशनगंज से होकर गुजरती है, लेकिन राज्य में एक भी स्टॉपेज न होने से सीमांचल के यात्रियों में भारी निराशा है।

ठाकुरगंज : देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन आधुनिक सुविधाओं और तेज रफ्तार के साथ कामाख्या और हावड़ा के बीच दौड़ रही है, लेकिन बिहार के सीमांचल के यात्रियों के लिए यह ट्रेन फिलहाल सिर्फ गुजरती हुई नजर आती है. ट्रेन किशनगंज रेलखंड से होकर गुजरती है, लेकिन बिहार में इसका एक भी ठहराव नहीं है.

किशनगंज से गुजरती है ट्रेन, नहीं मिलता बोर्डिंग का मौका

ट्रेन संख्या 27576 वंदे भारत स्लीपर शाम 6.15 बजे कामाख्या से हावड़ा के लिए रवाना होती है. अपने सफर के दौरान ट्रेन रंगिया, न्यू बोंगाईगांव, न्यू अलीपुरद्वार, न्यू कूचबिहार, जलपाईगुड़ी रोड, न्यू जलपाईगुड़ी और अलुआबाड़ी रोड होते हुए आगे बढ़ती है. इसके बाद ट्रेन मालदा के रास्ते हावड़ा पहुंचती है.

करीब 966 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन लगभग 14 घंटे में पूरी करती है और अगले दिन सुबह 8.15 बजे हावड़ा पहुंचती है. इस पूरे सफर में बिहार के हिस्से में किशनगंज समेत रेलखंड के कई इलाके आते हैं, लेकिन यात्रियों के लिए यहां ट्रेन में चढ़ने या उतरने की सुविधा नहीं है.

सीमांचल के यात्रियों को दूसरे राज्य जाना पड़ता है

किशनगंज से ट्रेन के गुजरने के बावजूद स्थानीय यात्रियों को इसमें सफर करने के लिए दूसरे राज्य के स्टेशन का रुख करना पड़ता है. इससे सीमांचल के यात्रियों के बीच किशनगंज में स्टॉपेज की मांग उठ रही है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि किशनगंज पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार के रूप में महत्वपूर्ण रेल क्षेत्र है. ऐसे में अगर वंदे भारत स्लीपर का यहां कम से कम दो मिनट का ठहराव मिल जाए तो किशनगंज सहित आसपास के जिलों के यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा में सुविधा मिल सकती है.

17 जनवरी को शुरू हुई थी पहली वंदे भारत स्लीपर

देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को 17 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालदा टाउन रेलवे स्टेशन से हावड़ा और कामाख्या के बीच हरी झंडी दिखाई थी. वातानुकूलित स्लीपर कोच और आधुनिक यात्री सुविधाओं से लैस यह ट्रेन लंबी दूरी की रेल यात्रा को सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी गई.

अब स्टॉपेज को लेकर उठ रहा सवाल

वंदे भारत स्लीपर के किशनगंज रेलखंड से गुजरने के बावजूद यहां ठहराव नहीं होने से स्थानीय यात्रियों में निराशा है. लोगों का सवाल है कि जब ट्रेन किशनगंज होकर गुजरती है, तो यहां दो मिनट का ठहराव क्यों नहीं दिया जा सकता. सीमांचल के लोगों को उम्मीद है कि रेलवे भविष्य में किशनगंज को भी इस ट्रेन के ठहराव वाले स्टेशनों में शामिल करेगा.


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लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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