ठाकुरगंज में बढ़ती गर्मी और तेज धूप के कारण जहां आम लोग छांव की तलाश कर रहे हैं, वहीं सड़क किनारे बैठा एक छाता मरम्मत करने वाला कारीगर इसी चिलचिलाती धूप के बीच अपनी रोजी-रोटी जुटाने में लगा हुआ है. खुद धूप से बचने के लिए एक छाते की ओट लिए यह कारीगर दिनभर लोगों के खराब और टूटे छातों को ठीक कर उन्हें दोबारा इस्तेमाल के लायक बना रहा है.
बढ़ती गर्मी में बढ़ी छातों की उपयोगिता
ठाकुरगंज क्षेत्र में गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही धूप और बारिश से बचने के लिए छातों की जरूरत काफी बढ़ गई है. हर व्यक्ति के लिए नया छाता खरीदना संभव नहीं होता. ऐसे में लोग पुराने छाते में छोटी-मोटी खराबी आने पर उसे फेंकने के बजाय दुरुस्त कराना बेहतर समझते हैं. इसी वजह से मौसम के साथ इस प्रकार के छोटे कारीगरों की मांग और रोजगार बना रहता है.
सड़क किनारे सिमटी दुनिया, मेहनत से चल रहा परिवार
दुकान या किसी बड़े शोरूम के बजाय सड़क किनारे सीमित जगह में बैठकर काम करने वाले इन कारीगरों की दैनिक आय पूरी तरह से ग्राहकों पर निर्भर करती है:
- छाते की छांव में काम: जिस छाते को ठीक कर यह कारीगर दूसरों को धूप और पानी से बचाता है, उसी छाते की छांव में बैठकर वह घंटों पसीना बहाता है.
- स्वावलंबन की मिसाल: दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद मिलने वाले पैसों से ही उसके घर का चूल्हा जलता है.
यह दृश्य न केवल भीषण गर्मी के बीच आजीविका के लिए जारी संघर्ष को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि छोटा माना जाने वाला यह हुनर कई परिवारों के भरण-पोषण का मुख्य जरिया है.
