Train Delay: ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट: पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के कटिहार रेल मंडल के अंतर्गत रेल कंट्रोल रूम की कार्यशैली और ट्रेनों के परिचालन प्रबंधन पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं. मंगलवार को ट्रेन संख्या 15464 बालुरघाट-कटिहार इंटरसिटी एक्सप्रेस को ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर एक गलत निर्णय के कारण लंबे समय तक रोक दिया गया, जबकि दूसरी दिशा से आ रही ट्रेन संख्या 15719 कटिहार-सिलिगुड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस को पंजीपाड़ा से आगे बढ़ा दिया गया. कंट्रोल के इस बेमेल फैसले के कारण बालुरघाट इंटरसिटी में सवार दैनिक यात्रियों और आम राहगीरों को तपती गर्मी में बेवजह भारी परेशानी और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी.
अलुआबाड़ी जंक्शन पर आसानी से हो सकती थी क्रॉसिंग, बिगाड़ा गया खेल
रेलवे परिचालन के जानकारों और भुक्तभोगी यात्रियों का कहना है कि दोनों ट्रेनों की क्रॉसिंग (मेल-मिलाप) बेहद आसानी और सुचारू रूप से अलुआबाड़ी रोड जंक्शन पर कराई जा सकती थी. अगर ऐसा रणनीतिक निर्णय लिया जाता, तो बालुरघाट इंटरसिटी को ठाकुरगंज स्टेशन के आउटर या प्लेटफॉर्म पर घंटों तक समय बर्बाद नहीं करना पड़ता और दोनों ही ट्रेनें अपने निर्धारित समय पर गंतव्य की ओर आगे बढ़ जातीं. लेकिन कंट्रोलर के अदूरदर्शी निर्णय ने पूरी रेल व्यवस्था को पटरी से उतार दिया.
“एडजस्टमेंट जोन” बन गया है ठाकुरगंज रेलखंड, यात्रियों ने लगाए गंभीर आरोप
ट्रेन लेट होने के कारण ठाकुरगंज स्टेशन पर खड़े यात्रियों में भारी आक्रोश और नाराजगी देखी गई. ट्रेन में सफर कर रहे यात्री सुशांत कुमार, संतोष सिंह सहित अन्य यात्रियों ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए बताया:
“जितनी देर में डाउन कटिहार इंटरसिटी पंजीपाड़ा से होकर अलुआबाड़ी जंक्शन पहुंचती, उतनी ही देर में अप बालुरघाट इंटरसिटी भी आराम से ठाकुरगंज से खुलकर अलुआबाड़ी पहुंच जाती और वहीं पर दोनों ट्रेनों की सुरक्षित क्रॉसिंग हो जाती. लेकिन रेलवे कंट्रोलर की लचर प्लानिंग के कारण हमारी ट्रेन को ठाकुरगंज में ही डिटेन (खड़ा) कर दिया गया.”
यात्रियों ने यह भी संगीन आरोप लगाया कि बालुरघाट इंटरसिटी के साथ इस तरह की सौतेली मां जैसी अनदेखी अब लगभग रोज की आदत बन चुकी है. अक्सर इस महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेन को छोटे-छोटे देहाती स्टेशनों और हॉल्ट पर जबरन रोक दिया जाता है और मालगाड़ियों या अन्य ट्रेनों को वीआईपी प्राथमिकता दी जाती है. इसके चलते रोजाना सफर करने वाले हजारों नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और मरीजों का कीमती समय बर्बाद होता है. आक्रोशित लोगों का कहना है कि इस पूरे ठाकुरगंज रेलखंड को विभाग ने केवल एक “एडजस्टमेंट जोन” बनाकर छोड़ दिया है, जहां ट्रेनों के लेट-लतीफी को छुपाने के नाम पर सबसे पहले स्थानीय यात्रियों की सुविधाओं की बलि चढ़ाई जाती है.
रेल प्रशासन से परिचालन में तत्काल सुधार की मांग
ठाकुरगंज के स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि कटिहार रेल मंडल के वरीय अधिकारियों को इस परिचालन व्यवस्था की खुद समीक्षा करनी चाहिए, ताकि यात्रियों को बार-बार इस तरह की अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े. लगातार हो रही लेट-लतीफी और उपेक्षा से अब सीमांचल की जनता में रेल प्रशासन के प्रति अविश्वास और नाराजगी का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है. यात्रियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस रूट पर ट्रेनों के बेवजह ठहराव को नहीं सुधारा गया, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगे.
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