ठाकुरगंज
लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के अवसर पर इस बार रेलवे स्टेशनों पर भी भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है. ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर छठ के पारंपरिक गीत गूंज रहे हैं, जिससे यात्रियों को घर जैसी अनुभूति हो रही है.कांच ही बांस के बहंगिया… शनिवार सुबह से बज रहे ये गीत छठ के लिए घर जाने वाले यात्रियों को सुखद अनुभूति दे रहे है. स्टेशन के उद्घोषणा तंत्र से ””उगाहो सुरुज देव भोर भोरे भिनसरवा अरग के बेरिया हो…, ””मंगीला हम वरदान हे गंगा मइया””, ””कांच ही बांस के बहंगिया””, और ””केलवा के पात पर उगेलन सुरुजदेव”” जैसे प्रसिद्ध छठ गीत बज रहे हैं. इन गीतों को सुनकर यात्री, खासकर महिलाएं, भाव-विभोर हो रही हैं और कई लोग इन्हें गुनगुनाते भी देखे गए. बताते चले भारतीय रेलवे ने इस वर्ष पहली बार यह सांस्कृतिक पहल की है. इसका उद्देश्य यात्रियों को यात्रा के दौरान सुकून देना और उन्हें बिहार की संस्कृति व परंपरा से जोड़ना है. बताते चले छठ पर्व के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों को लौटते हैं.
सैकड़ों स्टेशन पर बज रहे गीत
यह लोकधुन केवल ठाकुरगंज तक सीमित नहीं है. मिली जानकारी के अनुसार किशनगंज, जोगबनी, कटिहार, हावड़ा, सियालदाह, नई दिल्ली, आनंद विहार, पटना, दानापुर, राजेंद्र नगर, भागलपुर, सुल्तानगंज, जमालपुर, मुंगेर, पूर्णिया, मोतिहारी, गोरखपुर सहित कई स्टेशनों पर छठ गीत सुनाई दे रहे हैं. इस बाबत यात्रियों ने बताया की यह पहल यात्रियों के लिए केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति का संगम बन गई है.
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