किशनगंज जिले का ठाकुरगंज उपडाकघर आखिरकार छह दशकों के लंबे इंतजार के बाद अपने पुराने और जर्जर भवन को छोड़कर नए किराए के भवन में शिफ्ट हो गया है. नए भवन में पर्याप्त जगह और आधुनिक माहौल मिलने से कर्मचारियों के साथ-साथ हजारों उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है. हालांकि, इस राहत के साथ कई नई व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आ गई हैं, जिससे उपभोक्ताओं में असंतोष देखा जा रहा है.
पहले तल्ले पर संचालन से बुजुर्गों और दिव्यांगों की बढ़ी परेशानी
नए भवन में डाकघर का संचालन प्रथम तल (First Floor) पर शुरू किया गया है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए केवल सीढ़ियों का ही एकमात्र सहारा है:
- लिफ्ट का अभाव: भवन में लिफ्ट की कोई व्यवस्था नहीं होने से बुजुर्गों, दिव्यांगों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को ऊपर जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.
- पार्सल और स्पीड पोस्ट में कठिनाई: भारी-भरकम पार्सल, रजिस्ट्री और सामान लेकर आने वाले ग्राहकों के लिए सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाना किसी चुनौती से कम नहीं है.
पार्किंग न होने से सड़क पर लगेगा जाम, हादसों का डर
नए डाकघर परिसर में गाड़ियों के खड़े करने के लिए कोई अलग से पार्किंग स्पेस नहीं बनाया गया है:
- सड़क किनारे वाहन खड़े करने की मजबूरी: डाकघर में रोजाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही होती है. पार्किंग न होने के कारण ग्राहकों को अपने दोपहिया और चारपहिया वाहन मुख्य सड़क पर ही खड़े करने पड़ रहे हैं.
- यातायात बाधित होने की आशंका: सड़क किनारे बेतरतीब वाहन खड़े होने से न केवल ट्रैफिक व्यवस्था चरमराएगी और जाम की स्थिति बनेगी, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी काफी बढ़ गया है.
वार्षिक 15 करोड़ का लेन-देन, विभाग से सुविधाओं की मांग
ठाकुरगंज उपडाकघर का दायरा काफी बड़ा है, जहां ग्राहकों की भारी तादाद जुड़ी हुई है:
| प्रमुख आंकड़े व सेवाएं | विवरण |
| कुल खाताधारक | लगभग 40,000 |
| वार्षिक वित्तीय लेन-देन | 12 से 15 करोड़ रुपये |
| प्रमुख सेवाएं | स्पीड पोस्ट, रजिस्ट्री, पार्सल बुकिंग, डाक बचत बैंक, डाक जीवन बीमा आदि |
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नए भवन में डाकघर का स्थानांतरण एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन विभाग को जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए धरातल (Ground Floor) पर बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए काउंटर की व्यवस्था और पार्किंग का समुचित समाधान निकालना चाहिए.
