ठाकुरगंज स्टेशन की उपेक्षा पर फिर बवाल, रेलवे के जवाब को चुनौती, PMO से स्वतंत्र जांच की मांग

Thakurganj Station: ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन की उपेक्षा को लेकर विवाद फिर गरमाया. रेल यात्री समिति ने रेलवे के जवाब को भ्रामक बताते हुए पीएमओ से स्वतंत्र जांच और शिकायत दोबारा खोलने की मांग की है.

ठाकुरगंज(किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Thakurganj Station: चिकन नेक कॉरिडोर जैसे सामरिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन की उपेक्षा का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय में दर्ज शिकायत पर पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे द्वारा दिए गए जवाब को रेल यात्री समिति ने तथ्यहीन और भ्रामक बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है.

मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है, जहां समिति ने पीएमओ को विस्तृत प्रत्युत्तर भेजकर न सिर्फ शिकायत को दोबारा खोलने की मांग की है, बल्कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की भी अपील की है.

आखिर विवाद की जड़ क्या है

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के महाप्रबंधक ने निरीक्षण के दौरान ठाकुरगंज स्टेशन पर रुककर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संगठनों से संवाद नहीं किया. साथ ही अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चल रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए थे.

रेलवे का जवाब और बढ़ा विवाद

रेलवे की ओर से कहा गया कि स्टेशन पर ठहराव के लिए कोई अग्रिम अनुरोध नहीं मिला था, इसलिए वहां रुकने का कार्यक्रम नहीं रखा गया. साथ ही यह भी दावा किया गया कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप चल रहे हैं और शिकायत का निस्तारण कर दिया गया है.

लेकिन रेल यात्री समिति ने इस जवाब को पूरी तरह खारिज कर दिया है. समिति का कहना है कि रेलवे ने मूल सवालों का जवाब देने के बजाय औपचारिक बयान देकर मामले को बंद करने की कोशिश की है.

नियम पर खड़ा हुआ सबसे बड़ा सवाल

समिति ने अपने प्रत्युत्तर में यह सवाल उठाया है कि आखिर किस नियम के तहत किसी महाप्रबंधक या उच्च अधिकारी से मिलने अथवा स्टेशन निरीक्षण के लिए पूर्व अनुमति जरूरी है. इस पर रेलवे की ओर से किसी भी नियम या परिपत्र का हवाला नहीं दिया गया है, जिससे जवाब की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं.

समिति ने आरोप लगाया है कि अमृत भारत योजना के तहत किए गए कार्यों की न तो कोई स्वतंत्र जांच हुई और न ही तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट सार्वजनिक की गई. ऐसे में बिना जांच के कार्यों को सही ठहराना पारदर्शिता के खिलाफ बताया गया है.

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Thakurganj Station: पीएमओ से फिर हस्तक्षेप की मांग

रेल यात्री समिति ने प्रधानमंत्री कार्यालय से अपील की है कि मामले को दोबारा खोला जाए, किसी स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराई जाए और ठाकुरगंज स्टेशन पर हुए सभी कार्यों की तकनीकी समीक्षा कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए.

अब यह विवाद सिर्फ एक रेलवे स्टेशन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और रणनीतिक महत्व वाले क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की गंभीरता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है.

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लेखक के बारे में

By Pratyush prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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