ठाकुरगंज में आधी रात घर के बाहर दिखा पैंगोलिन, अजीब जीव को देख ग्रामीणों में मची सनसनी

Rare Pangolin Found: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में बुधवार की मध्य रात्रि एक दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीव पैंगोलिन (सजंई) मिलने से हड़कंप मच गया. गांव के एक घर के बाहर रेंगते हुए इस अनोखे जीव को देखने के लिए आधी रात को ही ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसके बाद मुस्तैद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर इसे सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया.

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Rare Pangolin Found: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत पथरिया पंचायत के पथरिया गांव में बुधवार की देर रात प्रकृति का एक अनोखा और दुर्लभ नजारा देखने को मिला. यहां मध्य रात्रि को एक रिहायशी मकान के बाहर अचानक दुनिया के सबसे शर्मीले और विलुप्तप्राय जीवों में शुमार पैंगोलिन को टहलते हुए देखा गया. घर के बाहर किसी विचित्र आकृति के जीव को हिलते-डुलते देख परिजनों के होश उड़ गए. शोर मचने पर आधी रात को ही लाठी-डंडों और टॉर्च के साथ ग्रामीण इकट्ठा हो गए. शुरुआत में लोग इसकी पीठ पर मौजूद वज्र जैसी कठोर ढाल और विचित्र शारीरिक बनावट को देखकर डर गए, लेकिन बाद में प्रबुद्ध ग्रामीणों ने इसकी पहचान पैंगोलिन के रूप में की और इसकी भनक तुरंत वन विभाग के अधिकारियों को दी.

दुनिया में सबसे ज्यादा तस्करी होने वाला जीव है पैंगोलिन; पर्यावरण के लिए है वरदान

सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम आवश्यक साजो-सामान के साथ त्वरित गति से पथरिया गांव पहुंची. वन कर्मियों ने पूरी संवेदनशीलता और सुरक्षात्मक उपायों का पालन करते हुए पैंगोलिन को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर लिया और उसे अपने वाहन से विभागीय रेस्क्यू सेंटर ले आई. वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को जानकारी देते हुए बताया कि पैंगोलिन ‘शेड्यूल-1’ के तहत एक अत्यंत दुर्लभ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित वन्यजीव है. इसके शरीर पर केराटिन के बने कड़े शल्क (स्केल्स) होते हैं. वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, अपनी औषधीय भ्रांतियों के कारण यह दुनिया में सबसे अधिक अवैध शिकार और तस्करी का दंश झेलने वाला स्तनधारी जीव है, इसलिए इसका संरक्षण बेहद जरूरी है.

“सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा”: वन विभाग की जनता से अपील

पथरिया गांव में इस अनोखे मेहमान के आने की खबर गुरुवार सुबह तक पूरे इलाके में टॉक ऑफ द टाउन बनी रही और इसे देखने के लिए आस-पास की पंचायतों के लोग भी जुटे रहे. वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि यह जीव इंसानों पर हमला नहीं करता बल्कि मुख्य रूप से चींटियों और दीमकों को खाकर पर्यावरण और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों से रक्षा करता है.

वन विभाग की सीमांचल के लोगों से अपील

वनाधिकारियों ने बताया कि फिलहाल पैंगोलिन को डॉक्टरों की निगरानी में पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, जो पूरी तरह स्वस्थ है. सभी आवश्यक विधिक व चिकित्सकीय प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद इसे इसके अनुकूल घने प्राकृतिक जंगलों या राष्ट्रीय उद्यान के सुरक्षित आवास में स्वतंत्र रूप से छोड़ दिया जाएगा. इसके साथ ही वन विभाग ने सीमांचल के लोगों से पुरजोर अपील की है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा और जंगलों से सटे इलाकों में यदि कोई भी ऐसा वन्यजीव, औषधीय पक्षी या अजगर दिखाई दे, तो उसे खुद पकड़ने या नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत प्रशासन को सूचित करें ताकि पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा की जा सके.

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By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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