मुख्य बातें:
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Thakurganj Railway Station Coach : बिहार के सीमांचल प्रक्षेत्र अंतर्गत पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के ठाकुरगंज स्टेशन पर यात्री सुविधाओं को मुस्तैद करने के विधिक दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है. रेलवे प्रशासन द्वारा यात्रियों को आधुनिक डिजिटल इनपुट देने और सुचारू यात्रा संधारित करने के नाम पर लाखों रुपये के बजट से कोच गाइडेंस डिस्प्ले सिस्टम लगाया गया था. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह पूरी व्यवस्था तकनीकी लापरवाही और लचर रखरखाव के कारण महज एक शोभा की वस्तु बनकर रह गई है. आए दिन महत्वपूर्ण ट्रेनों के आगमन के समय भी यह कनिष्ठ सिस्टम ठप रहता है, जिससे यात्रियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है.
प्लेटफॉर्म पर खड़ी रही ट्रेन, स्क्रीन रही बेखबर; ‘नो ट्रेन’ का दिखता रहा संदेश
स्टेशन पर उत्पन्न इस विसंगति और रेल यात्रियों की कड़ियों की मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं. शनिवार की सुबह जब एक मुख्य एक्सप्रेस ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी, तो बोगियों की सही विधिक स्थिति (कोच पोजीशन) न जानने के कारण यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई.
हैरत की बात यह रही कि ट्रेन प्लेटफॉर्म पर मुस्तैद थी, कली-मजदूर और मुसाफिर चढ़-उतर रहे थे, लेकिन अत्याधुनिक डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड को इसकी भनक तक नहीं थी. कनिष्ठ पर्दों पर तकनीकी विफलता के कारण लाइव डेटा प्रदर्शित करने के बजाय नो-ट्रेन का एरर मैसेज रिफ्लेक्ट हो रहा था, जिसके चलते यात्रियों को कुली या अन्य प्रभारियों से पूछताछ के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा.
Thakurganj Railway Station Coach: बुजुर्गों और महिलाओं की बढ़ी फजीहत; कम स्टॉपेज के कारण दुर्घटना का डर
“ठाकुरगंज के प्रबुद्ध नागरिकों और नियमित सफर करने वाले यात्रियों ने बताया कि इस तकनीकी विसंगति का सबसे मर्मस्पर्शी और बुरा असर कनिष्ठ बच्चों, महिलाओं और लाचार बुजुर्गों पर पड़ता है. ठाकुरगंज स्टेशन पर कई एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव बेहद सीमित समय के लिए होता है. ऐसे में कोच डिस्प्ले बंद रहने से यात्रियों को भारी सामान लेकर अगले से पिछले छोर तक लाइव दौड़ लगानी पड़ती है, जिससे चलती ट्रेन में चढ़ने के दौरान बड़ी दुर्घटना की कमान संधारित होने का खतरा हमेशा बना रहता है.”
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बजट खपाने की विधिक खानापूर्ति; स्थानीय प्रभारियों से तत्काल सुधार की मांग
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और कनिष्ठ रेल कमेटियों का खुला आरोप है कि रेलवे विभाग केवल टेंडर जारी कर सरकारी राशि खपाने की विधिक खानापूर्ति संधारित करता है, लेकिन उन उपकरणों का नियमित संचालन सुनिश्चित करने में पूरी तरह मौन रहता है.
प्रक्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने कटिहार रेल मंडल के वरिष्ठ कप्तानों से मांग की है कि ठाकुरगंज जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन की इस बुनियादी विसंगति का त्वरित संज्ञान लिया जाए. लोगों का कहना है कि जब तक इस कोच डिस्प्ले कमान को पूरी तरह सुचारू और लाइव नहीं किया जाता, तब तक जिम्मेदार तकनीकी प्रभारियों की जवाबदेही तय की जाए ताकि यात्रियों को इस आधुनिक विधिक सुविधा का वास्तविक लाभ धरातल पर मिल सके.
