राष्ट्रीय राजमार्ग NH-327E पर गलगलिया और ठाकुरगंज के बीच इन दिनों एक ऐसा अनूठा नजारा देखने को मिल रहा है, जो सीमांचल की बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि उद्यमिता की नई मिसाल पेश कर रहा है. सड़क किनारे कतारबद्ध सजी दर्जनों अनानास की दुकानें न केवल यात्रियों का ध्यान खींच रही हैं, बल्कि स्थानीय किसानों और छोटे व्यापारियों की किस्मत भी बदल रही हैं.
जब हाईवे ही बन गया किसानों की सीधी मंडी
अनानास उत्पादन के लिए प्रसिद्ध गलगलिया-ठाकुरगंज क्षेत्र के किसानों के लिए NH-327E किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रहा है. पहले जहां किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बिचौलियों और दूर-दराज की मंडियों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब खेत से सुबह तोड़ा गया अनानास कुछ ही घंटों में सीधे ग्राहकों की गाड़ियों तक पहुंच रहा है.
मध्यस्थों (बिचौलियों) की भूमिका घटने से किसानों को उपज का उचित मूल्य मिल रहा है, जबकि पूर्वोत्तर भारत से दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और यूपी जाने वाले यात्रियों को बाजार से कम कीमत में खेत का ताजा और रसदार फल मिल जाता है.
पूर्वोत्तर से दिल्ली-राजस्थान जाने वाले यात्रियों का पसंदीदा पड़ाव
यह मार्ग सिक्किम, पूर्वोत्तर राज्यों और उत्तर बंगाल को देश के पश्चिमी और उत्तरी राज्यों से जोड़ता है. रोजाना यहां से गुजरने वाली कारों, एसयूवी और ट्रकों के चालक यहां रुककर अनानास खरीदना अपनी यात्रा का अभिन्न हिस्सा बना चुके हैं.
कई यात्री मौके पर ही अनानास छिलवाकर इसका स्वाद लेते हैं, तो कई दूर-दराज अपने घर ले जाने के लिए दर्जनों फल पैक करवाते हैं. इस तरह सीमांचल में उगा अनानास रोजाना हजारों किलोमीटर दूर देश के विभिन्न कोनों तक पहुंच रहा है.
स्थानीय स्तर पर रोजगार का बड़ा जरिया
अनानास का यह सीजनल कारोबार पूरे इलाके के लिए आजीविका का मुख्य साधन बन गया है. फल तोड़ने वाले मजदूरों से लेकर ट्रांसपोर्टेशन करने वाले चालकों, दुकानों पर फल काटने और पैकिंग करने वाले युवाओं तक, सैकड़ों परिवारों को इससे सीधा रोजगार मिल रहा है.
'अनानास कॉरिडोर' के रूप में मिल सकती है राष्ट्रीय पहचान
स्थानीय निवासियों और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन इस क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करे—जैसे कि सड़क किनारे सुरक्षित पार्किंग, शेड, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था करे—तो यह मार्ग "अनानास कॉरिडोर" के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकता है. इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किशनगंज जिले के कृषि उत्पादों की एक सशक्त ब्रांडिंग भी होगी.
