सेना स्टेशन के प्रस्तावित क्षेत्र में 86.89 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री चर्चा में

किशनगंज जिले में प्रस्तावित सैन्य स्टेशन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के बीच, 86.89 एकड़ भूमि की खरीद-बिक्री चर्चा का विषय बन गई है। सिर्फ सात खरीदारों के नाम दर्ज हुईं 24 रजिस्ट्रियां, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं।

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड के भेलागुड़ी मौजा में भारतीय सेना के प्रस्तावित सैन्य स्टेशन के लिए 189.68 एकड़ निजी भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है. इसी बीच अधिग्रहण क्षेत्र में जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच हुई भूमि खरीद-बिक्री चर्चा का विषय बन गई है.

उपलब्ध निबंधन दस्तावेजों के अनुसार इस अवधि में भेलागुड़ी मौजा में करीब 86.89 एकड़ (8689.709 डेसिमल) भूमि की 24 रजिस्ट्रियां सिर्फ सात खरीदारों के नाम दर्ज हुई हैं.

सात खरीदारों के नाम हुईं 24 रजिस्ट्रियां.

दस्तावेजों के अनुसार इमरान प्रतापगढ़ी और तश्कील अहमद के नाम नौ-नौ रजिस्ट्रियां दर्ज हैं. वहीं मोहम्मद शमीम के नाम दो रजिस्ट्रियां हुई हैं. इसके अलावा मोहम्मद सलमान खान, मोहम्मद सुल्तान, सुलेमान खान और मोहम्मद अनस के नाम एक-एक रजिस्ट्री दर्ज है. इस प्रकार कुल 86.89 एकड़ भूमि इन सात लोगों के नाम दर्ज हुई.

दस्तावेजों में समानता भी आई सामने.

उपलब्ध विक्रय-पत्रों के अनुसार इमरान प्रतापगढ़ी, मोहम्मद सलमान खान, मोहम्मद सुल्तान और सुलेमान खान के दस्तावेजों में पिता का नाम मोहम्मद इल्यास खान दर्ज है. वहीं, कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति द्वारा इसी अवधि में भूमि का हस्तांतरण विक्रय विलेख और दान विलेख दोनों के माध्यम से किए जाने का तथ्य भी सामने आया है. हालांकि, यह अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं माना जा सकता.

भूमि की प्रकृति को लेकर भी चर्चा.

कुछ विक्रय-पत्रों में संबंधित भूमि की प्रकृति "आवासीय" दर्ज है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि यह क्षेत्र पहले चाय बागान अथवा खाली जमीन के रूप में जाना जाता था. इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर किसी प्रकार की पुष्टि नहीं की गई है.

अवर निबंधक ने क्या कहा

ठाकुरगंज के अवर निबंधक डॉ. कुमार दीनबंधु ने बताया कि निबंधन के समय 200 मीटर के दायरे में भूमि की प्रकृति और सर्किल रेट के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है. निबंधन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संपन्न की जाती है.

सैन्य स्टेशन परियोजना को मिली हाई प्रायोरिटी

रक्षा संपदा अधिकारी, सिलीगुड़ी के 20 अप्रैल 2026 के पत्र के अनुसार प्रस्तावित सैन्य स्टेशन के लिए संयुक्त सर्वेक्षण और सीमांकन का कार्य पूरा हो चुका है. इस परियोजना को रक्षा मंत्रालय की हाई प्रायोरिटी परियोजनाओं में शामिल बताया गया है. इसी अवधि में भेलागुड़ी मौजा में लगातार भूमि की रजिस्ट्रियां भी हुईं.

उठ रहे हैं ये प्रमुख सवाल

इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

  • क्या खरीदी गई भूमि प्रस्तावित अधिग्रहण क्षेत्र के भीतर आती है?
  • निबंधन और राजस्व अभिलेखों में भूमि की प्रकृति समान है या नहीं?
  • कम समय में सात लोगों द्वारा 86.89 एकड़ भूमि खरीदने का उद्देश्य क्या था?
  • यदि भूमि अधिग्रहित होती है तो मुआवजे का लाभ किसे मिलेगा?
  • क्या पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई?

अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों में दिखाई देने वाले तथ्य अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं हैं. किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले राजस्व, निबंधन और भूमि अधिग्रहण से संबंधित अभिलेखों की सरकारी जांच आवश्यक होगी.


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लेखक के बारे में

अवधेश कुमार विगत 25 वर्षों से पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. इन्होंने बतौर पत्रकार अपने कैरियर की शुरूआत वर्ष 2001 से की. उसके बाद विगत 15 वर्षो से प्रभात खबर, किशनगंज के कार्यालय प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं. इनकी रूचि राजनीतिक, सामाजिक व अपराध से जुड़ी खबरों में है.

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