ठाकुरगंज में खेल प्रतिभाएं बेबस: मैदानों में सुविधाओं का टोटा, सालों से सरकारी क्रिकेट अकादमी का इंतजार कर रहे युवा

Thakurganj Cricket Academy Demand: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज नगर क्षेत्र में सुबह और शाम क्रिकेट खेलने वाले बच्चों और युवाओं का हुजूम यह साबित करने के लिए काफी है कि यहां खेल के प्रति जुनून की कोई कमी नहीं है. लेकिन कड़वी हकीकत यह है कि इन उभरती प्रतिभाओं को न तो आधुनिक प्रशिक्षण मिल पा रहा है और न ही सरकारी स्तर पर कोई ऐसा मंच, जहां वे अपने हुनर को तराश सकें.

Thakurganj Cricket Academy Demand: क्रिकेट के प्रति बढ़ते दीवानेपन के बावजूद ठाकुरगंज आज भी एक अदद सरकारी क्रिकेट अकादमी की राह देख रहा है. क्षेत्र में खेल मैदान तो मौजूद हैं, लेकिन वे बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं. इसके चलते ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के होनहार खिलाड़ियों की प्रतिभा स्थानीय स्तर पर ही दम तोड़ने को मजबूर है या फिर उन्हें कड़े संघर्ष के बीच दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ रहा है.

मैदान तो हैं पर सुविधाएं नदारद, हाईस्कूल ग्राउंड की हालत खस्ता

ठाकुरगंज में क्लब मैदान, गांधी मैदान और हाईस्कूल मैदान जैसे कई खेल मैदान उपलब्ध हैं, जहां समय-समय पर स्थानीय टूर्नामेंट भी होते हैं. इसके बावजूद खिलाड़ियों के नियमित अभ्यास के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का घोर अभाव है:

  • पिच और समतलीकरण की समस्या: हाईस्कूल मैदान की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है. मैदान असमान और कच्चा होने के कारण खिलाड़ियों को अभ्यास में काफी कठिनाइयां आती हैं.
  • मानक मानकों की अनदेखी: यहां कोई मानक क्रिकेट पिच (टर्फ या कंक्रीट) नहीं है, जिससे मैच जैसी वास्तविक परिस्थितियों में अभ्यास संभव नहीं हो पाता. मैदान में घास की छंटाई, रोलिंग और समतलीकरण की नियमित व्यवस्था न होने से इसकी गुणवत्ता लगातार गिर रही है.

प्रशिक्षण व्यवस्था बेहद कमजोर, कोच का टोटा

क्षेत्र में क्रिकेट की तकनीकी बारीकियां सिखाने की व्यवस्था बेहद सीमित है:

  • नेट प्रैक्टिस की कमी: नेट प्रैक्टिस की सुविधा केवल क्लब मैदान में 'ठाकुरगंज क्लब' की ओर से अपने स्तर पर उपलब्ध कराई जाती है. गांधी मैदान और हाईस्कूल मैदान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है.
  • प्रमाणित कोच नहीं: प्रशिक्षित और प्रमाणित (एनआईएस या बीसीसीआई लेवल) कोच की कमी के कारण युवाओं को सही तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिल पाता.

निजी प्रयास सराहनीय, लेकिन संसाधन सीमित

स्थानीय स्तर पर 'ठाकुरगंज क्लब' द्वारा युवाओं को क्रिकेट प्रशिक्षण देने का संचालन किया जा रहा है, जो एक सकारात्मक और सराहनीय पहल है. हालांकि, क्लब के पास सीमित संसाधन और फंड होने के कारण यह प्रयास पूरे क्षेत्र की जरूरतों और हजारों युवाओं की उम्मीदों को पूरा करने में सक्षम नहीं है. आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना बड़ी संख्या में प्रतिभाओं को आगे लाना एक बड़ी चुनौती है.

"अवसर मिले तो राष्ट्रीय स्तर पर चमकेंगे यहाँ के खिलाड़ी"

ठाकुरगंज में खेल की बदहाली और युवाओं के दर्द को लेकर क्षेत्र के वरिष्ठ खेल प्रेमियों और पूर्व खिलाड़ियों ने अपनी चिंता व्यक्त की है:

"ठाकुरगंज और इसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों में क्रिकेट प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है. यहां के कई लड़कों ने अपने दम पर जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं तक में अपनी पहचान बनाई है. हमारा स्पष्ट मानना है कि यदि सरकार यहां एक बेहतर मैदान, प्रशिक्षित कोच और आधुनिक किट व सुविधाएं उपलब्ध करा दे, तो इस सीमांचल क्षेत्र से भी राष्ट्रीय स्तर और आईपीएल (IPL) जैसे मंचों पर खेलने वाले खिलाड़ी निकल सकते हैं. सरकार को अविलंब यहां खेल सुविधाओं का विस्तार करना चाहिए." — बिमल सिंह और संजय सिन्हा, पूर्व क्रिकेटर, ठाकुरगंज

खेल प्रेमियों की प्रमुख मांगें:

स्थानीय नागरिकों, खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने प्रशासन तथा खेल विभाग से निम्नलिखित मांगें दोहराई हैं:

  1. ठाकुरगंज में एक सर्वसुविधाजनक सरकारी क्रिकेट अकादमी की स्थापना की जाए.
  2. मौजूदा खेल मैदानों का आधुनिकीकरण कर वहां मानक क्रिकेट पिच का निर्माण हो.
  3. सभी प्रमुख मैदानों में नेट प्रैक्टिस (Net Practice) की व्यवस्था और योग्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति हो.
  4. खेल को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से जिला एवं प्रखंड स्तरीय आधिकारिक क्रिकेट प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाए.


प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >