ठाकुरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में मार्च 2026 में तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अखलाकुर्रहमान के खिलाफ महिला स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बहुचर्चित मामले में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फैसला आया है. महीनों चली विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद प्रमंडलीय आयुक्त, पूर्णिया ने डॉ. अखलाकुर्रहमान को सभी आरोपों से पूरी तरह आरोपमुक्त (एक्सोनरेट) घोषित कर दिया है. इसके साथ ही उन्हें पुनः ठाकुरगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रभार सौंपने का आधिकारिक आदेश जारी किया गया है.
क्या था पूरा विवाद?
मार्च 2026 में ठाकुरगंज सीएचसी की कुछ महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने तत्कालीन प्रभारी डॉ. अखलाकुर्रहमान पर मानसिक प्रताड़ना, अनुचित व्यवहार और वेतन से अवैध कटौती जैसे गंभीर आरोप लगाए थे. इस मामले ने पूरे जिले में तूल पकड़ लिया था, जिसके बाद अस्पताल परिसर में विरोध-प्रदर्शन हुए थे और स्वास्थ्य मंत्री तक शिकायत पहुंची थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और बाद में प्रमंडलीय आयुक्त स्तर से जांच के आदेश दिए गए थे.
जांच में आधारहीन पाए गए सभी आरोप
प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश पर उप निदेशक (कल्याण), पूर्णिया प्रमंडल द्वारा की गई विस्तृत जांच की रिपोर्ट (पत्रांक-218, दिनांक 12 मई 2026) प्रस्तुत की गई:
- साक्ष्यों की पड़ताल: जांच टीम ने शिकायतकर्ताओं, अस्पताल के कर्मचारियों तथा संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए और विभागीय अभिलेखों की गहन पड़ताल की.
- जांच रिपोर्ट का निष्कर्ष: रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि डॉ. अखलाकुर्रहमान के विरुद्ध लगाए गए आरोप किसी भी स्तर पर प्रमाणित नहीं हुए. सभी आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत और आधारहीन पाए गए.
- पुनः योगदान की अनुशंसा: जांच टीम ने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए डॉ. अखलाकुर्रहमान का पुनः योगदान कराने की सिफारिश की थी.
प्रमंडलीय आयुक्त का आधिकारिक आदेश
जांच प्रतिवेदन का परीक्षण करने के उपरांत प्रमंडलीय आयुक्त, पूर्णिया ने अपना अंतिम आदेश जारी कर दिया:
प्रशासनिक आदेश: "डॉ. अखलाकुर्रहमान को सभी आरोपों से दोषमुक्त किया जाता है. स्वास्थ्य विभाग, बिहार के नियमानुसार वरिष्ठतम चिकित्सा पदाधिकारी होने के नाते उन्हें पुनः प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, ठाकुरगंज का प्रभार सौंपा जाए."
आयुक्त कार्यालय ने इस आदेश की प्रतिलिपि डॉ. अखलाकुर्रहमान और जिलाधिकारी किशनगंज को आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई के लिए भेज दी है. इस फैसले के साथ ही महीनों से चले आ रहे विवाद का पूरी तरह पटाक्षेप हो गया है.
