35 रुपये के रेल सफर के बदले ₹150 की बस यात्रा: ठाकुरगंज-पूर्णिया रूट पर सुबह की ट्रेन चलाने की उठी मांग

ठाकुरगंज-पूर्णिया रेलखंड के शुरू हुए एक साल हो गए, लेकिन केवल एक जोड़ी यात्री ट्रेन चलने से लाखों ग्रामीण परेशान हैं. ₹35 की रेल यात्रा के मुकाबले ₹150 की बस यात्रा करने को मजबूर मरीजों और आम लोगों ने सुबह नई ट्रेन चलाने की मांग की है.

सीमांचल के सुदूरवर्ती और पिछड़े इलाके के लोगों को बेहतर व सस्ती यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू हुआ ठाकुरगंज-पूर्णिया रेलखंड एक साल बाद भी आम यात्रियों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका है. जिस रेल लाइन के चालू होने से सीमावर्ती क्षेत्र में आवागमन की नई क्रांति का सपना देखा गया था, वह आज महज मालगाड़ियों के दौड़ने का जरिया बनकर सिमट गया है.

रेलखंड शुरू हुए पूरा एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन रेलवे प्रशासन द्वारा आज भी इस पूरे रूट पर 24 घंटे में महज एक जोड़ी यात्री ट्रेन का ही परिचालन किया जा रहा है. नतीजतन, दर्जनभर स्टेशनों से जुड़े लाखों ग्रामीण आज भी अपनी यात्रा के लिए महंगे और असुविधाजनक बस सफर पर निर्भर हैं.

मेडिकल हब पूर्णिया जाने वाले मरीजों पर सबसे भारी मार

इस रूट पर ट्रेनों की कमी का सबसे गंभीर असर सीमावर्ती क्षेत्र के मरीजों और तीमारदारों पर पड़ रहा है:

  • गलत टाइमिंग का संकट: पूर्णिया पूरे कोसी-सीमांचल का सबसे बड़ा मेडिकल हब है. ठाकुरगंज और आसपास के गांवों से सैकड़ों मरीज प्रतिदिन जांच और विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श के लिए पूर्णिया जाते हैं.
  • दोपहर की ट्रेन बेअसर: वर्तमान में एकमात्र उपलब्ध ट्रेन ठाकुरगंज से दोपहर 2:02 बजे रवाना होती है. सुबह ओपीडी में पर्चा कटाने और दोपहर तक डॉक्टरों को दिखाने वाले मरीजों के लिए यह समय पूरी तरह अनुपयोगी साबित होता है.

किराए का गणित: 4 गुना महंगा सफर झेलने को मजबूर गरीब

ट्रेन के अभाव में आम जनता की जेब पर सीधा डाका पड़ रहा है:

यात्रा माध्यमकिराया (प्रति यात्री)असर
यात्री ट्रेन (Passenger)मात्र ₹35सबसे किफायती, लेकिन सुबह कोई विकल्प नहीं
एक्सप्रेस ट्रेन (Express)लगभग ₹70समय और पैसे दोनों की बचत (ट्रेन अनुपलब्ध)
सड़क मार्ग (प्राइवेट बस)करीब ₹150मजबूरी में 4 गुना अधिक किराया और घंटों की फजीहत

सस्ती रेल सेवा के अभाव में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को हर महीने इलाज और आवश्यक कार्यों के लिए निजी बसों को भारी किराया चुकाना पड़ रहा है.

मालगाड़ियों के लिए हरी झंडी, तो पैसेंजर ट्रेनों में देरी क्यों?

दैनिक यात्रियों और स्थानीय नागरिकों का सीधा सवाल है कि जब पटरियों पर मालगाड़ियों के लगातार फेरों के लिए रेलवे के पास ट्रैक और सिग्नल उपलब्ध हैं, तो आम जनता की पैसेंजर ट्रेनों के विस्तार में इतनी उदासीनता क्यों बरती जा रही है?

सुबह के समय नई ट्रेन शुरू करने की पुरजोर मांग

क्षेत्रीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और दैनिक यात्रियों ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) प्रशासन से मांग की है कि:

  • प्रातःकालीन ट्रेन सेवा: ठाकुरगंज से सुबह 6:00 से 7:30 बजे के बीच पूर्णिया के लिए एक अतिरिक्त पैसेंजर या डेमू ट्रेन शुरू की जाए, जिससे मरीज सुबह 9 बजे तक अस्पताल पहुंच सकें.
  • शाम को वापसी: इसी प्रकार शाम 5:00 से 7:00 बजे के बीच पूर्णिया से ठाकुरगंज के लिए वापसी सेवा मिले, ताकि लोग दिनभर का काम निपटाकर उसी दिन अपने घर लौट सकें.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक सुबह की सीधी ट्रेन नहीं दी जाती, तब तक करोड़ों रुपये की लागत से बने इस रेलखंड का असली लाभ सीमांचल की जनता को नहीं मिल पाएगा.

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लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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