किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट
Retua River Chachri Bridge: सीमांचल के सीमावर्ती इलाकों में मानसूनी रफ्तार के साथ ही तबाही का मंजर भी शुरू हो गया है. नेपाल के तराई प्रक्षेत्र में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र से गुजरने वाली सुहिया रेतुआ नदी उफान पर है. सोमवार की सुबह नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज जलप्रवाह के कारण चिल्हनियां पंचायत के सुहिया घाट पर ग्रामीणों के सहयोग से बना बांस-बल्ले का अस्थायी चचरी पुल ताश के पत्तों की तरह ढहकर पानी में बह गया. इस हादसे के बाद सीमावर्ती प्रक्षेत्र की लगभग 50 हजार की आबादी का संपर्क मुख्य मार्गों से पूरी तरह भंग हो गया है, जिससे लोग अब जान जोखिम में डालकर नाव के सहारे नदी पार करने को विवश हैं.
ग्रामीणों ने श्रमदान से बनाया था सहारा; अब नाव बनी एकमात्र विकल्प
- श्रमदान की मेहनत पर फिरा पानी: सुहिया रेतुआ नदी पर आजादी के बाद से अब तक कोई स्थायी पुल नहीं बन सका है. हर साल की तरह इस बार भी स्थानीय ग्रामीणों ने चंदा और श्रमदान कर बांस का चचरी पुल संधारित किया था, जो मानसून की पहली बड़ी लहर भी नहीं झेल सका.
- ये गांव हुए पूरी तरह अलग-थलग: इस चचरी पुल के सहारे चिल्हनियां पंचायत सहित डाकपोखर पंचायत के हवाकोल, मियांपुर, दुर्गापुर, बैगना, चौरी, मटियारी, कलियागंज, झाला समेत दर्जनों गांवों के लोग रोज जिला व प्रखंड मुख्यालय आते-जाते थे. पुल टूटने से इन सभी गांवों की कड़ियां टूट चुकी हैं.
“आजादी के सात दशक बाद भी हमारी पंचायत सड़क और पुल-पुलिया जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है. सुहिया रेतुआ नदी पर आरसीसी (RCC) पुल निर्माण के लिए सांसद, विधायक और जिला प्रशासन के मुख्य कप्तानों को कई बार लिखित आवेदन दिया गया, लेकिन आज तक धरातल पर कोई ठोस पहल नहीं हुई. अब अगले छह महीने तक लोग जान हथेली पर रखकर नाव से सफर करेंगे.” — मोफत लाल ऋषिदेव, मुखिया, चिल्हनियां पंचायत
आजादी के बाद से सिर्फ मिला आश्वासन; बीमारों को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती
स्थानीय ग्रामीणों और मुखिया ने बताया कि पुल विहीन होने के कारण बरसात के दिनों में सबसे गंभीर संकट गर्भवती महिलाओं और इमरजेंसी मरीजों के सामने खड़ा होता है. बाढ़ और उफान के वक्त एम्बुलेंस या गाड़ियां नदी के उस पार ही रुक जाती हैं, जिससे समय पर इलाज न मिलने के कारण कई बार जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ता है.
स्कूली बच्चों और किसानों की बढ़ी फजीहत; आरसीसी पुल की मांग तेज
पुल ध्वस्त होने की इस क्रमिक आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित स्कूली छात्र-छात्राएं, रोज कमाने-खाने वाले मजदूर और अपनी फसलों को मंडियों तक ले जाने वाले किसान हो रहे हैं. क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए अविलंब सुहिया रेतुआ नदी पर एक मजबूत और स्थायी आरसीसी पुल निर्माण की कड़ियों को संधारित करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक यहां पक्का पुल नहीं बनता, तब तक क्षेत्र का चहुंमुखी विकास पूरी तरह अवरुद्ध रहेगा.
