किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड की एक तस्वीर शिक्षा व्यवस्था के दावों की जमीनी हकीकत बयां कर रही है. प्रखंड के हवाकोल पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बगुलाहागी के छात्र-छात्राएं पिछले 12 सालों से बदहाल पहुंच पथ का दंश झेल रहे हैं. शिक्षा हासिल करने के लिए इन मासूम बच्चों को हर दिन जान जोखिम में डालकर बांस से बने एक जर्जर 'चचरी पुल' का सहारा लेना पड़ता है. बरसात के दिनों में यह सफर और भी खौफनाक हो जाता है, जिससे अभिभावकों की सांसें हर वक्त अटकी रहती हैं.
12 साल से जारी है बदहाली, नौनिहालों की सुरक्षा राम भरोसे
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय तक पहुंचने के इस मार्ग की दुर्दशा कोई नई बात नहीं है:
- दशकों पुरानी समस्या: विद्यालय तक सुरक्षित पहुंच मार्ग की समस्या पिछले करीब 12 वर्षों से जस की तस बनी हुई है.
- यही है मुख्य रास्ता: पंचायत सरकार भवन गोरियाहाट से उत्क्रमित मध्य विद्यालय बगुलाहागी तक पहुंचने के लिए यही एकमात्र मुख्य मार्ग है.
- रोजाना आवागमन: इसी जोखिम भरे चचरी पुल वाले रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, शिक्षक और ग्रामीण आवागमन करने को मजबूर हैं.
बारिश में और खतरनाक हो जाता है यह चचरी पुल
बांस से बने इस जुगाड़ के पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण स्थिति काफी गंभीर हो गई है:
- फिसलन का खौफ: बारिश के समय यह रास्ता और पुल बेहद फिसलन भरा हो जाता है, जिससे बच्चों के नदी/नाले में गिरने और बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है.
- अभिभावक रहते हैं चिंतित: बच्चों की सुरक्षा को लेकर उनके अभिभावक हमेशा खौफ के साए में रहते हैं, लेकिन मजबूरी में उन्हें स्कूल भेजना पड़ता है.
अधिकारी और जनप्रतिनिधि बेपरवाह, ग्रामीणों ने की यह मांग
सिस्टम की अनदेखी से आजिज आ चुके स्थानीय लोगों ने अब आर-पार की बात कही है:
- शिकायतों पर नहीं हुआ असर: ग्रामीणों ने बताया कि कई बार संबंधित जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकृष्ट कराया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला.
- स्थायी पुल की मांग: ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि विद्यालय तक जल्द से जल्द एक सुरक्षित पहुंच मार्ग या स्थायी पक्के पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को इस जानलेवा मजबूरी से हमेशा के लिए निजात मिल सके.
