सिंगल लाइन बनी यात्रियों की बड़ी परेशानी, दिनभर रुक-रुक कर चल रही ट्रेनें

किशनगंज के सिलीगुड़ी-ठाकुरगंज-अलुआबाड़ी रेलखंड पर सिंगल लाइन होने के कारण रोजाना ट्रेनें घंटों लेट चल रही हैं, जिससे यात्री परेशान हैं. हालांकि रेलवे की पिंक बुक में रूट के दोहरीकरण के लिए फाइनल सर्वे (FLS) को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन काम शुरू होने की समय सीमा तय नहीं है.

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट. सिलीगुड़ी–ठाकुरगंज–अलुआबाड़ी रेलखंड पर सिंगल लाइन (एकहरी रेल पटरी) की व्यवस्था इन दिनों उत्तर बंगाल और सीमांचल के रेल यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है. इस रूट पर क्षमता से अधिक ट्रेनों के दबाव और सिंगल ट्रैक होने के कारण आए दिन ट्रेनों का परिचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. मंगलवार सुबह भी इसका असर तब देखने को मिला, जब कटिहार–सिलीगुड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस (15719) अपने निर्धारित समय से करीब 42 मिनट विलंब से ठाकुरगंज स्टेशन पहुंची. इस लेटलतीफी के कारण डाउन दिशा से आ रही हल्दीबाड़ी–बालुरघाट इंटरसिटी एक्सप्रेस (15464) को काफी देर तक ठाकुरगंज स्टेशन पर ही रोक कर रखना पड़ा.

क्रॉसिंग के चक्रव्यूह में फंस रही हैं कई प्रमुख ट्रेनें

स्थानीय रेल उपभोक्ताओं और दैनिक यात्रियों का कहना है कि यह किसी एक दिन की समस्या नहीं है, बल्कि इस रूट पर दिनभर यही स्थिति बनी रहती है. ट्रेनों के इस ‘क्रॉसिंग गेम’ के कारण हजारों यात्रियों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है:

  • कंचनकन्या व राधिकापुर का फेर: कभी कंचनकन्या एक्सप्रेस को पास कराने के लिए राधिकापुर इंटरसिटी को आउटर या स्टेशनों पर घंटों खड़ा किया जाता है.
  • मालदा व महानंदा का इंतजार: मालदा अप ट्रेन को निकालने के लिए मालदा डाउन और महानंदा एक्सप्रेस को लूप लाइन में डालकर इंतजार कराया जाता है.
  • शाम का संकट: शाम के समय स्थिति और बदतर हो जाती है, जब कैपिटल एक्सप्रेस और महानंदा एक्सप्रेस की क्रॉसिंग करानी होती है. इस दौरान हल्दीबाड़ी–बालुरघाट इंटरसिटी के यात्रियों को ठाकुरगंज और आसपास के स्टेशनों पर भारी परेशानी झेलनी पड़ती है.

पिंक बुक में दोहरीकरण सर्वे की घोषणा, पर समय सीमा तय नहीं

लगातार उठ रही मांगों के बीच सीमांचल और उत्तर बंगाल के रेल यात्रियों के लिए राहत की उम्मीद तब जगी थी, जब भारतीय रेलवे की आधिकारिक पिंक बुक में इस पूरे रेल नेटवर्क के कायाकल्प की योजना को शामिल किया गया था. पिंक बुक के अनुसार, निम्नलिखित खंडों के दोहरीकरण (डबलिंग) के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण की घोषणा की गई है:

  1. ठाकुरगंज–सिलीगुड़ी रेलखंड (कुल दूरी: 57 किलोमीटर) का दोहरीकरण.
  2. अलुआबाड़ी रोड–ठाकुरगंज सेक्शन (कुल दूरी: 19 किलोमीटर) का दोहरीकरण.
  3. अररिया–ठाकुरगंज नई रेल लाइन परियोजना (कुल दूरी: 111 किलोमीटर) का दोहरीकरण.

यात्रियों में संशय बरकरार

रेलवे के जानकारों और अधिकारियों का मानना है कि इन तीनों बड़ी परियोजनाओं के धरातल पर पूरा होने से सिंगल लाइन की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी. ट्रैक की क्षमता बढ़ने से न केवल नई ट्रेनों के परिचालन का रास्ता साफ होगा, बल्कि ट्रेनों की लेटलतीफी पर भी पूरी तरह नियंत्रण लग सकेगा. हालांकि, यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता और संशय की बात यह है कि रेलवे बोर्ड की ओर से अभी तक इन योजनाओं पर भौतिक कार्य शुरू होने या इसे पूरा करने की कोई निश्चित समय सीमा (डेडलाइन) तय नहीं की गई है, जिससे कागजी घोषणाओं के बाद भी जमीन पर तत्काल कोई बड़ी राहत मिलती नहीं दिख रही है.

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Published by: Divyanshu Prashant

Divyanshu Prashant is a contributor at Prabhat Khabar.

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