Kishanganj Road Crisis: पौआखाली से रणविजय की रिपोर्ट. जिला मुख्यालय को भारत-नेपाल सीमावर्ती इलाके से जोड़ने वाली डेरामारी वाया पौआखाली जियापोखर–कद्दूभिट्ठा सड़क के चौड़ीकरण का मामला वर्षों से अटका हुआ है. विभागीय लापरवाही और फाइलों में उलझी प्रक्रिया के कारण अब तक कोई ठोस काम शुरू नहीं हो सका है. इससे स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी और मायूसी देखी जा रही है.
नेताओं की कोशिशें भी बेअसर
इस सड़क के चौड़ीकरण को लेकर क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों ने लगातार आवाज उठाई है. ठाकुरगंज विधायक Gopal Kumar Agrawal, पूर्व मंत्री Nausad Alam, पूर्व विधायक Anzar Naeemi और पूर्व विधायक Saud Alam ने अलग-अलग स्तर पर इस मुद्दे को उठाया, लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है.
हाल ही में भी पथ निर्माण विभाग को पत्र देकर सड़क चौड़ीकरण की मांग तेज की गई थी, लेकिन उसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई.
2022-23 से अटका प्रस्ताव
सूत्रों के मुताबिक आरसीडी किशनगंज की ओर से वर्ष 2022-23 में 7 से 8 मीटर चौड़ीकरण का प्रस्ताव बनाकर पटना भेजा गया था. इसके बावजूद चार साल बाद भी योजना फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी है.
ग्रामीणों का कहना है कि हर बार आश्वासन तो मिलता है, लेकिन काम शुरू नहीं होता.
संकरी सड़क बनी जाम और हादसों का कारण
यह सड़क अब अपनी क्षमता से कहीं अधिक ट्रैफिक दबाव झेल रही है. संकरी सड़क पर रोजाना लंबा जाम लगता है. वाहन एक-दूसरे से टकराने की स्थिति में पहुंच जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ गया है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई हादसों में जानमाल की क्षति भी हो चुकी है, बावजूद इसके कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया.
सीमावर्ती क्षेत्र की अहम सड़क, फिर भी उपेक्षा
यह मार्ग भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है. व्यापार और आवाजाही दोनों प्रभावित हो रहे हैं.
ग्रामीणों की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि अगर जल्द सड़क चौड़ीकरण पर काम शुरू नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे. लोगों का कहना है कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम दिखना चाहिए.
