रेतुआ नदी का जलस्तर बढ़ने से लोधाबाड़ी डायवर्सन बहा, दर्जनों गांवों का संपर्क टूटा

Retua River Diversion Washed Away: किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड में मानसून की दस्तक के साथ ही जनजीवन बेपटरी होने लगा है. बुधवार को रेतुआ नदी के जलस्तर में अचानक हुई अप्रत्याशित वृद्धि और पानी की तेज धार के कारण लोधाबाड़ी स्थित एक महत्वपूर्ण अस्थायी डायवर्सन पानी में बह गया, जिससे दोनों छोर के दर्जनों गांवों का आपसी संपर्क पूरी तरह भंग हो गया है.

किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट

Retua River Diversion Washed Away: बिहार के सीमावर्ती और अत्यधिक बाढ़ प्रवण जिला किशनगंज में नदियों के उफान ने समय से पहले ही ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत धवेली पंचायत के लोधाबाड़ी में रेतुआ नदी पर आरपी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा एक आरसीसी (RCC) पुल का निर्माण कराया जा रहा है. पुल निर्माण कार्य के पूर्ण न होने के कारण कंपनी द्वारा आम जनता और राहगीरों की सुविधा के लिए समीप ही एक अस्थायी मिट्टी-ह्यूम पाइप का डायवर्सन (वैकल्पिक रास्ता) तैयार किया गया था. बुधवार को जलग्रहण क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद रेतुआ नदी में अचानक सैलाब आ गया, जिसकी तेज लहरें इस कच्चे डायवर्सन को अपने साथ बहा ले गईं. डायवर्सन के टूटते ही इलाके में आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है.

12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करने की मजबूरी; छात्र और मरीज सर्वाधिक प्रभावित

  • एकमात्र सहारा छिना: ग्रामीणों ने बताया कि नदी के पार स्थित गांवों के लिए प्रखंड मुख्यालय, मुख्य बाजारों और अस्पतालों तक पहुंचने का यह डायवर्सन ही एकमात्र सुलभ साधन था.
  • लंबा डायवर्जन रूट: रास्ता बंद होने के कारण अब ग्रामीणों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को अपने गंतव्य और जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए अन्य लिंक रोड से होकर लगभग 12 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी (लंबा चक्कर) तय करनी पड़ रही है.
  • दैनिक गतिविधियों पर ब्रेक: इस मार्ग के अवरुद्ध होने से दूध-सब्जी विक्रेताओं, स्कूली छात्र-छात्राओं की नियमित पढ़ाई और सबसे गंभीर रूप से आपातकालीन मरीजों को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

संवेदक की कछुआ चाल से नाराजगी; ग्रामीणों ने की वैकल्पिक मार्ग की मांग

अधूरे पुल निर्माण पर उठे सवाल: स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी (संवेदक) की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है. लोगों का कहना है कि यदि पुल का निर्माण समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाता, तो मानसून की पहली ही बाढ़ में यह नारकीय स्थिति उत्पन्न नहीं होती.

टेढ़ागाछ प्रखंड में उत्पन्न इस आवागमन संकट की भौगोलिक और निर्माण संबंधी रूपरेखा नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:

प्रभावित क्षेत्र व पंचायतकिस नदी पर बना था डायवर्सननिर्माण करने वाली मुख्य एजेंसीवर्तमान भौतिक स्थितिजनजीवन पर पड़ने वाला मुख्य असर
लोधाबाड़ी, धवेली पंचायत
(प्रखंड- टेढ़ागाछ, किशनगंज)
रेतुआ नदी
(महानंदा की सहायक नदी)
आरपी कंस्ट्रक्शन
(RP Construction)
तेज धार में बहकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त* दर्जनों गांवों का संपर्क टूटा.
* 12 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर.

प्रशासन और संवेदक से शीघ्र पहल की गुहार

घटना के बाद से नदी के दोनों किनारों पर स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा है, जो बहते पानी के बीच जान जोखिम में डालकर नदी पार करने का प्रयास कर रहे हैं. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने किशनगंज जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग तथा संबंधित कार्यपालक अभियंता से अविलंब हस्तक्षेप करने की मांग की है. ग्रामीणों ने पुरजोर अपील की है कि संवेदक के माध्यम से तुरंत नाव (नौका) की व्यवस्था कराई जाए या कोई अन्य सुरक्षित वैकल्पिक स्टील/बंबू पाथवे बनाया जाए. साथ ही आरसीसी पुल के निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए जाएं, ताकि मानसून के आगामी महीनों में क्षेत्र के लोगों को पूर्ण रूप से टापू बनने और भुखमरी जैसी स्थिति से बचाया जा सके.

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By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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