किशनगंज जिले के पौआखाली क्षेत्र में पिछले कई दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के लिए बीते दो दिनों में हुई झमाझम बारिश संजीवनी बनकर आई है. तेज धूप और पानी की भारी किल्लत के कारण सूखने के कगार पर पहुंच चुकी धान की फसल को इस मानसूनी फुहारों से नया जीवन मिला है. खेतों में जलभराव और पर्याप्त नमी पहुँचने से पौधों में एक बार फिर हरियाली लौट आई है, जिससे क्षेत्र के किसानों की चिंता दूर हुई है.
पेटभरी चौन में मुरझा रही थी धान की रोपाई
पौआखाली के प्रसिद्ध पेटभरी चौन इलाके में सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि पर किसानों ने बड़े पैमाने पर धान की रोपाई की है. हालांकि, रोपाई के बाद लगातार बारिश न होने से खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही थी. तेज धूप के कारण पौधे मुरझाने लगे थे और किसान निजी सिंचाई संसाधनों (पंपसेट) पर निर्भर होने को मजबूर थे, जिससे उनकी लागत बढ़ रही थी.
बारिश से फसल को मिला संजीवनी बूस्टर
पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार और रिमझिम बारिश ने खेतों को लबालब भर दिया है:
- पौधों में लौटी हरियाली: पानी की पर्याप्त उपलब्धता से धान के पौधे तेजी से बढ़ने लगे हैं.
- सिंचाई लागत में बचत: बारिश के पानी से किसानों को महंगे पंपसेट चलाने से मुक्ति मिली है.
- उत्पादन बढ़ने की उम्मीद: समय पर हुई इस बारिश से फसल की बढ़वार अच्छी होगी, जिससे इस बार बंपर पैदावार की उम्मीद जगी है.
आगे भी बारिश जारी रहने की आस
धान की खेती के शुरुआती और वृद्धि चरण में पानी की उपलब्धता फसल की सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. पेटभरी चौन के हरे-भरे खेत किसानों की मेहनत और उम्मीदों को बयां कर रहे हैं.
स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में भी समय-समय पर इसी तरह बारिश का सिलसिला बना रहा, तो इस वर्ष धान की रिकॉर्ड फसल होगी. फिलहाल, इस बारिश ने क्षेत्र के किसान परिवारों को बड़ी मानसिक और आर्थिक राहत दी है.
