दिघलबैंक सीमावर्ती इलाकों में जंगली हाथियों के बढ़ते आतंक से बचाव के लिए वन विभाग द्वारा चलाया जा रहा पांच दिवसीय जागरूकता अभियान सोमवार को संपन्न हो गया. इस अभियान के तहत हाथी प्रभावित गांवों का लगातार दौरा कर ग्रामीणों को हाथियों से बचाव के व्यावहारिक और देसी उपायों की जानकारी दी गई. इसी क्रम में वन विभाग की जागरूकता टीम ने धनतोला दुर्गा मंदिर घाट, हनुमान चौक, टंगटंगी समेत अन्य गांवों में कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को सतर्क किया. बताया गया कि हर वर्ष मकई के मौसम में नेपाल के जंगलों से हाथियों का झुंड सीमावर्ती इलाकों में प्रवेश कर धनतोला, करूवामनी, आठगछिया और दिघलबैंक पंचायत के एक दर्जन से अधिक गांवों में डेरा डाल देता है. फसल पकने तक हाथी खेतों में भारी तबाही मचाते हैं, जिससे किसानों को लाखों रुपये की फसल और कई बार आवासीय क्षति भी झेलनी पड़ती है. वन विभाग ने इस वर्ष हाथियों की आहट से पहले ही तैयारी शुरू कर दी है. आधुनिक उपकरणों के बजाय देसी और प्राकृतिक तरीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है. इसके लिए वन विभाग ने बेंगलुरु से एक विशेष विशेषज्ञ को आमंत्रित किया है, जिनकी बताई तकनीकें असम, नागालैंड, कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में प्रभावी साबित हो चुकी हैं. विशेषज्ञ के निर्देश पर वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के बीच मॉकड्रिल कर इन उपायों का प्रदर्शन किया. वन कर्मियों ने पुराने तेल के टीन में गोबर के उपलों के साथ सूखी मिर्च जलाने तथा बांस में बोरे में मिर्च लपेटकर जलाने से निकलने वाले तीखे धुएं द्वारा हाथियों को रोकने की विधि समझाई. इसके अलावा हाथियों के आने वाले मुख्य रास्तों पर नीम और तीखी पत्तियों वाले पौधे लगाने की सलाह दी गई. आवासीय इलाकों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों को घरों से कुछ दूरी पर नींबू, विशेषकर काजी नींबू के पौधे लगाने की सलाह दी गई. इसकी तेज गंध और कांटेदार बनावट हाथियों को घरों और खेतों के पास आने से रोकती है, वहीं किसानों के लिए यह अतिरिक्त आय का स्रोत भी बन सकता है. जागरूकता कार्यक्रम में वनरक्षक अंकित कुमार, रोशन गामी, श्रीराम कुमार, पंकज कुमार, वनपाल रोशन कुमार, मुकेश मरीक, सूरज कुमार, प्रभात कुमार तथा स्थानीय वालंटियर भूषण कुमार गोस्वामी समेत अन्य कर्मी मौजूद थे. ग्रामीणों ने अभियान की सराहना करते हुए वन विभाग को सहयोग का भरोसा दिलाया.
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