ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
MLA Meets Health Minister: भारत-नेपाल सीमा से सटे और रणनीतिक रूप से संवेदनशील किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर सुर्खियां बटोर रही है. क्षेत्र की तीन लाख से अधिक की विशाल आबादी को बेहतर और मुफ्त चिकित्सा संबल प्रदान करने वाली सरकारी कड़ियां पूरी तरह ध्वस्त नजर आ रही हैं. इस गंभीर प्रशासनिक व सामाजिक संकट को दूर करने के लिए ठाकुरगंज के विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से पटना में एक विशेष मुलाकात की. इस दौरान विधायक ने क्षेत्र की जर्जर स्वास्थ्य हकीकत का ब्योरा देते हुए मंत्री को दो अलग-अलग मांगपत्र सौंपे, जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का आधिकारिक दर्जा देने और रिक्त पदों पर डॉक्टरों की अविलंब मुस्तैदी सुनिश्चित करने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई.
4 साल पहले बना नया भवन, लेकिन अब तक कागजों में अटका सीएचसी का दर्जा
- भवन तैयार, कमान अधूरी: विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री को जमीनी हकीकत से अवगत कराते हुए बताया कि वर्ष 2022 में ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का अत्याधुनिक भवन बनकर तैयार हो गया था और उसे स्वास्थ्य विभाग को विधिवत हस्तांतरित (Handover) भी कर दिया गया था. इसके बावजूद चार साल बीत जाने के बाद भी आज तक ठाकुरगंज को सीएचसी का दर्जा नहीं मिल सका है.
- 13 डॉक्टरों के पद सृजन का रास्ता साफ: अस्पताल को सीएचसी का दर्जा न मिलने के कारण सबसे बड़ा तकनीकी नुकसान यह हो रहा है कि यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों के नए पद सृजित नहीं हो पा रहे हैं. यदि इस पीएचसी को सरकार अपग्रेड कर सीएचसी संधारित करती है, तो अस्पताल में विभिन्न विभागों के कुल 13 डॉक्टरों के पद सृजित होंगे, जिससे सीमावर्ती प्रक्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था में एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव आएगा.
स्त्री रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त; प्रसव कक्ष और नर्सिंग स्टाफ का टोटा
“अस्पताल में महिला स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है. लंबे समय से महिला व स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) का पद खाली पड़ा है, जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं, जटिल प्रसव के मामलों और कनिष्ठ-वरिष्ठ स्त्री रोग से पीड़ित मरीजों को इलाज के लिए सीधे सिलीगुड़ी या पूर्णिया रेफर कर दिया जाता है.”
मांगपत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि अस्पताल के प्रसव कक्ष (लेबर रूम) को चौबीसों घंटे प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए कम से कम 16 स्टाफ नर्सों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में उपलब्ध नर्सिंग स्टाफ की संख्या बेहद कम है. इसके अतिरिक्त, आपातकालीन वार्ड के सुचारू संधारण के लिए ड्रेसर और ऑपरेशन थिएटर (OT) सहायकों की भी भारी कमी है, जिससे रोज आने वाले मरीजों की फजीहत हो रही है.
ढाई साल से बंद दंत चिकित्सा विभाग, लाखों की मशीनें खा रहीं जंग
- मशीनें होने लगीं खराब: ठाकुरगंज पीएचसी में पिछले करीब ढाई वर्षों से दंत चिकित्सक का पद पूरी तरह रिक्त पड़ा हुआ है. इसके कारण अस्पताल के डेंटल केबिन में स्थापित लाखों रुपये मूल्य के अत्याधुनिक दंत चिकित्सा उपकरण और कुर्सियां उपयोग के अभाव में धूल फांक रही हैं और खराब होने की कगार पर पहुंच गई हैं.
- गरीबों पर पड़ रहा आर्थिक बोझ: इस कमी के कारण क्षेत्र के गरीब, किसान और जरूरतमंद मरीजों को दांत के मामूली दर्द, उखाड़ने या रूट कैनाल जैसे सामान्य उपचार के लिए भी महंगे निजी डेंटिस्टों या प्राइवेट क्लीनिकों की कड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त आर्थिक मार पड़ रही है.
स्वास्थ्य मंत्री ने दिया आश्वासन; कागजों से हकीकत में उतरने का इंतजार
दवाओं के पारदर्शी वितरण और स्टॉक संधारण के लिए अस्पताल में फार्मासिस्ट की नियुक्ति की मांग को भी विधायक ने मजबूती से रखा. स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने विधायक द्वारा सौंपे गए दोनों मांगपत्रों की कड़ियों का गहनता से संज्ञान लेते हुए आश्वासन दिया है कि सीमावर्ती ठाकुरगंज की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए विभाग जल्द ही इस पीएचसी को सीएचसी में अपग्रेड करने और रिक्त पदों पर डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की प्रतिनियुक्ति को लेकर विशेष तकनीकी निर्देश संधारित करेगा. अब देखना यह है कि तीन लाख से अधिक जिलावासियों की सेहत से जुड़ा यह महत्वपूर्ण मुद्दा कब तक कागजी फाइलों से निकलकर धरातल पर मुस्तैद हो पाता है.
