पंचायतों में स्वच्छता और रखरखाव को लेकर किए जा रहे प्रशासनिक दावों की जमीनी हकीकत देखनी हो, तो ठाकुरगंज प्रखंड की खारुदाह पंचायत भवन की तस्वीर काफी है. महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों और बैठकों का केंद्र रहने वाले इस पंचायत भवन की छत पर बड़ी-बड़ी घास-फूस और पौधे उग आए हैं, जो लंबे समय से जारी प्रशासनिक उपेक्षा और साफ-सफाई के अभाव की गवाही दे रहे हैं.
जब मुख्य भवन बेहाल, तो वार्डों की स्वच्छता का क्या होगा?
पंचायत भवन जैसे महत्वपूर्ण परिसर की नियमित देखरेख और स्वच्छता की प्राथमिक जिम्मेदारी स्थानीय पंचायत प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की होती है. ग्रामीणों का कहना है कि जब मुख्य सरकारी परिसर की ही ऐसी दुर्दशा है, तो पंचायत के दूर-दराज के वार्डों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता व्यवस्था का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.
बरसात में छत को पहुंच सकता है भारी नुकसान
ग्रामीणों और जानकारों के अनुसार:
- जल निकासी में रुकावट: छत पर उगी झाड़ियों और घास-फूस के कारण मानसूनी बारिश के पानी की निकासी बाधित हो रही है.
- इमारत को खतरा: पौधों की जड़ें धीरे-धीरे छत की कंक्रीट में दरारें पैदा कर सकती हैं, जिससे बरसात के दिनों में पानी के रिसाव (Seepage) और भवन को स्थायी नुकसान पहुंचने की गंभीर संभावना बन गई है.
ग्रामीण बोले: कागजों तक सीमित स्वच्छता अभियान
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाने और जन-जागरूकता के बड़े-बड़े दावे केवल कागजों और बैठकों तक सीमित हैं. जमीनी स्तर पर सरकारी परिसरों की भी सुध नहीं ली जा रही है.
क्षेत्र के ग्रामीणों ने संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) और जिला प्रशासन से:
- खारुदाह पंचायत भवन की छत की तत्काल साफ-सफाई व मरम्मत कराने, और
- पूरी पंचायत में सफाई व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने की मांग की है.
बड़ा सवाल: जब पंचायत के 'शक्ति केंद्र' कहे जाने वाले पंचायत भवन की छत तक सफाई अभियान नहीं पहुंच पा रहा है, तो आम नागरिकों की गलियों में स्वच्छता का दावा कितना सच है?
