किशनगंज में जांच अभियान थमते ही फिर लौटे ओवरलोड वाहन: रेलवे माल गोदाम के पास बढ़ी आवाजाही

किशनगंज में जांच अभियान थमते ही ओवरलोड वाहनों का परिचालन एक बार फिर बेरोकटोक शुरू हो गया है. रेलवे माल गोदाम से क्षमता से दोगुना माल लादकर निकल रहे वाहन सड़कों पर जाम और हादसों का खतरा बढ़ा रहे हैं.

किशनगंज शहर में प्रशासनिक जांच अभियान के धीमे पड़ते ही ओवरलोड और अनियंत्रित व्यावसायिक वाहनों का परिचालन एक बार फिर बेरोकटोक शुरू हो गया है. कुछ दिन पूर्व जिला प्रशासन और परिवहन विभाग द्वारा चलाए गए सघन जांच अभियान के दौरान ओवरलोडिंग और बिना वैध दस्तावेजों के दौड़ रहे वाहनों पर काफी हद तक लगाम लगी थी. खासकर रेलवे माल गोदाम से निकलने वाले ट्रैक्टरों और ट्रकों पर सख्ती से चालकों में हड़कंप था. हालांकि, अभियान समाप्त होते ही स्थिति दोबारा पुराने ढर्रे पर लौट आई है और अब बाहरी जिलों के ओवरलोड वाहनों का दबाव भी शहर की सड़कों पर तेजी से बढ़ गया है.

जांच थमी तो बेखौफ हुए नियम तोड़ने वाले चालक

प्रशासनिक सख्ती के दौरान शहर की सड़कों पर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही लगभग नगण्य हो गई थी, लेकिन अभियान के ठंडे बस्ते में जाते ही मालवाहक नियमों की धज्जियां उड़ाने लगे हैं:

  • रेलवे माल गोदाम से दबाव: शहर स्थित रेलवे माल गोदाम से गंतव्य तक सामान पहुंचाने वाले ट्रैक्टर और मिनी ट्रक क्षमता से डेढ़ से दोगुना भार लादकर सड़कों पर निकल रहे हैं.
  • दूसरे जिलों के वाहनों की मनमानी: हाल के दिनों में पड़ोसी और अन्य जिलों से आने वाले भारी मालवाहक ट्रकों का ओवरलोड परिचालन भी काफी बढ़ गया है, जिन पर स्थानीय स्तर पर कोई प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही है.

हादसों की आशंका और संकरी सड़कों पर जाम का संकट

क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले इन वाहनों के कारण शहरवासियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है:

  • संतुलन बिगड़ने का जोखिम: भारी माल लदे ट्रैक्टर और ट्रक संकरी गलियों और मोड़ों पर संतुलन खोने के कगार पर पहुंच जाते हैं, जिससे पीछे और बगल में चल रहे दोपहिया व पैदल राहगीरों पर हमेशा जानलेवा हादसे का खतरा मंडराता रहता है.
  • आवागमन ठप: बड़े वाहनों की धीमी गति और बार-बार खराब होने से मुख्य बाजारों और प्रमुख चौराहों पर लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है, जिससे स्कूली बच्चों, एम्बुलेंस और आम राहगीरों का समय बर्बाद हो रहा है.

नागरिकों ने उठाई नियमित और सख्त जांच की मांग

स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों ने जिला प्रशासन, जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) और यातायात पुलिस से मांग की है कि जांच को केवल औपचारिक 'अभियान' तक सीमित न रखा जाए. शहर के प्रवेश द्वारों और रेलवे माल गोदाम के पास नियमित जांच चौकियां बनाकर ओवरलोड वाहनों का चालान काटा जाए और लगातार उल्लंघन करने वालों के परमिट रद्द किए जाएं, ताकि शहर की सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सके.

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लेखक के बारे में

By गौरव कुमार

गौरव कुमार प्रिंट माध्यम में 20 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 10 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. राजनीतिक, सामाजिक व अपराध की खबरों में विशेष रूचि है.

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