आस्था का केन्द्र है डोक नदी के किनारे स्थित ओद्रा काली मंदिर

1967 में शुरू हुई थी माता की पूजा

1967 में शुरू हुई थी माता की पूजा किशनगंज मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर बेलवा स्थित ओद्रा काली मंदिर आस्था का केन्द्र है. यहां भक्तों की मनोकामना भी पूरी होती है. भक्तों की अटूट आस्था मंदिर से जुड़े होने के कई प्रमाण मिले हैं. मंदिर में 59 वर्ष पूर्व वर्ष 1967 से पूजा शुरू होने की बात कही जा रही है. संजय कुमार ने बताया कि उस समय डोक नदी पर लकड़ी का पुल हुआ करता था. किन्ही कारणों से पुल क्षतिग्रस्त हो गया था. तब पूर्णिया व किशनगंज के लोगों को इस पार से उस पार जाने के लिए बेलवा पहुंचकर गाड़ी को बदलना पड़ता था. इस दौरान गाड़ी के चालक को कभी-कभार बेलवा पुल के इस पार ही रात गुजारनी पड़ती थी, तभी भागलपुर के रहने वाले सरकारी ठाकुर को स्वप्न में आया और स्वप्न में ही उन्हें ओद्रा में काली मंदिर स्थापित करने का आभाष हुआ. इसके बाद सरकारी ठाकुर ओद्रा पहुंचे और वही पर मां काली की पूजा शुरू की. इसके बाद से वहां मां काली की पूजा होने लगी. धीरे धीरे समाज के लोगों के सहयोग से मंदिर का निर्माण करवाया गया. मंदिर में मां काली की स्थायी प्रतिमा है. मंदिर के ठीक बगल में भैरव नाथ व बजरंगबली का मंदिर है. थोड़ी दूरी पर भगवान शिव व राम सीता का मंदिर है. मंदिर डोक नदी के किनारे है. मंदिर डोक नदी के किनारे बसे होने के कारण यह किसी पर्यटन स्थल से कम नहीं लगता है. यहां काली पूजा के दिन मेला लगाया जाता है.

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By Awadhesh kumar

अवधेश कुमार विगत 25 वर्षों से पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. इन्होंने बतौर पत्रकार अपने कैरियर की शुरूआत वर्ष 2001 से की. उसके बाद विगत 15 वर्षो से प्रभात खबर, किशनगंज के कार्यालय प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं. इनकी रूचि राजनीतिक, सामाजिक व अपराध से जुड़ी खबरों में है.

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