किशनगंज शहर में एक बार फिर से लॉटरी के कथित अवैध कारोबार की आहट सुनाई देने लगी है. बीते दिनों पुलिस की सख्त कार्रवाई के बाद जिस अवैध कारोबार पर पूरी तरह से लगाम लगने की बात कही जा रही थी, अब वही खेल नए नाम, नए ठिकाने और नए चेहरों के साथ दोबारा शुरू होने की चर्चा जोरों पर है. सूत्रों की मानें तो शहर में लॉटरी टिकटों की मौजूदगी सामने आई है और इस पूरे रैकेट के पीछे पुराना सिंडिकेट ही पर्दे के पीछे से अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है.
कार्रवाई की खामोशी के बाद अचानक शुरू हुई हलचल
बताया जा रहा है कि पूर्व में पुलिस द्वारा कथित लॉटरी नेटवर्क पर की गई ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए यह कारोबार पूरी तरह से शांत पड़ गया था. ऐसा प्रतीत हो रहा था कि शहर से लॉटरी का यह अवैध खेल खत्म हो गया है. हालांकि, सूत्रों के अनुसार यह खामोशी महज कुछ समय का अंतराल थी. पर्दा जरूर गिरा था, लेकिन खेल पूरी तरह से बंद नहीं हुआ था. अब इस नेटवर्क को एक नए सिरे से खड़ा किया गया है. चर्चा है कि छोटे और अनजान विक्रेताओं के जरिए लॉटरी के टिकट बाजार और ग्राहकों तक पहुंचाए जा रहे हैं, जबकि असली संचालक खुद को पुलिस की नजरों से बचाते हुए पर्दे के पीछे रखने की कोशिश कर रहे हैं.
बाजार में टिकट मौजूद, लेकिन संचालक गायब
इस पूरे मामले का सबसे रहस्यमयी पहलू यह है कि बाजार में लॉटरी के टिकट स्पष्ट रूप से नजर आ रहे हैं. इन टिकटों पर बड़े इनाम की राशि, ड्रॉ का समय और अन्य विवरण साफ-साफ दर्ज किए गए हैं. लेकिन इन टिकटों के पीछे का असली खिलाड़ी कौन है, इसका पता लगाना आसान नहीं है. यह सवाल लगातार उठ रहा है कि यदि ये टिकट वैध हैं, तो इनकी अधिकृत बिक्री की व्यवस्था क्या है. और यदि ये टिकट फर्जी हैं, तो इन्हें छापने, शहर में लाने और बेचने वाला यह संगठित नेटवर्क कौन चला रहा है. इसी सवाल के जवाब में किशनगंज के एक बड़े लॉटरी सिंडिकेट का पर्दाफाश छिपा हुआ है.
नए नेटवर्क के पीछे पुराने चेहरों के शामिल होने की आशंका
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस नए नेटवर्क के पीछे पुराने लॉटरी माफियाओं की भूमिका की गहन जांच की जानी चाहिए. केवल नाम और ठिकाना बदल जाने से यह नहीं माना जा सकता कि कारोबार का पूरा नेटवर्क बदल गया है. आशंका जताई जा रही है कि पुराने खिलाड़ी ही नए नाम के पीछे छिपकर इस पूरे खेल को संचालित कर रहे हैं. यदि यह दावा जांच में सही साबित होता है, तो यह केवल लॉटरी टिकटों की छिटपुट बिक्री का मामला नहीं रह जाएगा, बल्कि शहर में एक बड़े संगठित अवैध नेटवर्क के संचालन का गंभीर मामला बनेगा.
पुलिस की पूर्व की कार्रवाई और जांच की दरकार
किशनगंज शहर में लॉटरी के इस कथित कारोबार की बढ़ती चर्चा के बीच पुलिस और प्रशासन की भूमिका बेहद अहम हो गई है. किशनगंज पुलिस द्वारा लगातार लॉटरी के खिलाफ छापेमारी और कार्रवाई की जाती रही है. पूर्व में पुलिस ने करोड़ों रुपये मूल्य के अवैध लॉटरी टिकट जब्त किए हैं और कई बड़ी गिरफ्तारियां भी सुनिश्चित की हैं. अब जरूरत इस बात की है कि बाजार में सामने आए नए टिकटों की वैधता, उनकी बिक्री के स्रोत, छापने वाले ठिकाने और इससे जुड़े लोगों की पूरी कड़ी की गहनता से जांच की जाए. फिलहाल, आधिकारिक तौर पर इन नए टिकटों के अवैध होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस आहट ने प्रशासन को अलर्ट मोड पर जरूर ला दिया है.
