चुनाव में मोंथा बना विलेन,प्रचार पर लगा ब्रेक

जिले में वृहस्पतिवार से रिमिझिम फूहारों के बीच मध्यम से तेज गति में रूक-रूककर पूरे राज्य में बारिश होने से तापमान में कमी महसूस की जा रही है.

तीन दिनों से हो रही बारिश ने नेताओं के प्रचार रणनीति पर डाला खलल.

किशनगंज.विधानसभा चुनाव में चक्रवाती तुफान मोंथा विलेन साबित हो रहा है. बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तुफान मोंथा के कारण पूरे जिले में वृहस्पतिवार से रिमिझिम फूहारों के बीच मध्यम से तेज गति में रूक-रूककर पूरे राज्य में बारिश होने से तापमान में कमी महसूस की जा रही है.सबसे ज्यादा बारिश शुक्रवार को हुई.इस बेमौसम

बारिश से जहां सर्दी की दस्तक महसूस की जा रही है वहीं नेताओं के चुनावी दौरे पर ब्रेक लग गया है. लगातार बारिश से नेताओं का जनसंपर्क अभियान बाधित हुआ.वहीं स्टार प्रचारकों का हवाई दौरा भी बाधित हुआ. खराब मौसम के कारण हेलिकाप्टर उड़ान ही नही भर सका, जिससे नेताओं का चुनाव प्रचार रद्द करना पड़ा है.

दो दिन प्रचार-प्रसार हुआ प्रभावित

मूसलधार बारिश ने चुनावी मौसम को तो प्रभावित किया ही है,साथ ही चुनावी प्रचार में किस्मत आजमाने वाले प्रत्याशियों के लिए भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.इस बार चुनाव बहुत कम समय में संपन्न हो रहा है.दीपावली और छठ महापर्व के संपन्न होने के बाद उम्मीदवार चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक रही थी लेकिन अचानक बदले मौसम के मिजाज ने न केवल जनसंपर्क अभियान को प्रभावित किया है, बल्कि प्रत्याशियों की रणनीतियों पर भी पानी फेर दिया है.अब प्रत्याशी एक-एक मिनट के कीमत को समझ कर परेशान हैं, क्योंकि भारी बारिश के कारण न तो चुनाव प्रचार के लिए बड़े नेताओं का हेलीकॉप्टर लैंड कर पा रहा है और न ही बारिश में उनके समर्थक उनका साथ देने के लिए बाहर निकल रहे हैं.

जनसंपर्क अभियान पर मौसम का असर

पिछले दो दिनों से हो रही मूसलधार बारिश ने प्रत्याशियों का जनसंपर्क अभियान बुरी तरह प्रभावित किया है. क्योंकि बारिश के कारण कई लोग खासकर समर्थक और कार्यकर्ता घरों में कैद हो गये हैं.जनसंपर्क अभियान के लिए बनाये गये प्लान पर बारिश ने पानी फेर दिया है. इसके चलते नेताजी की रातों की नींद गायब हो गयी है और अब वे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से वोटरों तक अपनी अपील पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. इस मौसम में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगर उनका कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित होता है और भीड़ नहीं जुटती, तो यह उनके वोटरों पर बुरा असर डाल सकता है. इस स्थिति से बचने के लिए कोई भी प्रत्याशी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन नहीं करना चाह रहा है, जिनमें मौसम की बेरुखी के चलते कम भीड़ जुटने का खतरा हो.

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By AWADHESH KUMAR

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