चाय पत्तियों में प्रतिबंधित कीटनाशक 'मोनोक्रोटोफॉस' पर सख्ती से हड़कंप, छोटे किसानों और बागान मालिकों के सामने गहराया संकट

सीमांचल के किशनगंज में टी बोर्ड की नई गाइडलाइन ने चाय उद्योग में हड़कंप मचा दिया है. प्रतिबंधित कीटनाशक मोनोक्रोटोफॉस पर सख्ती से हजारों छोटे चाय किसानों की आजीविका खतरे में है, क्योंकि बॉटलीफ फैक्ट्रियां MRL रिपोर्ट के बिना पत्तियां खरीदने से इनकार कर रही हैं.

सीमांचल के प्रमुख चाय उत्पादक जिले किशनगंज में टी बोर्ड (Tea Board of India) और नॉर्थ बंगाल टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (NBTPA) की नई गाइडलाइन लागू होने के बाद चाय उद्योग में बड़ा संकट खड़ा हो गया है. चाय पत्तियों में प्रतिबंधित कीटनाशक 'मोनोक्रोटोफॉस' (Monocrotophos) के इस्तेमाल पर बढ़ी सख्ती के चलते कई बॉटलीफ फैक्ट्रियों ने बिना मैक्सिमम रेसिड्यू लिमिट (MRL) रिपोर्ट या प्रमाण-पत्र के हरी पत्तियां खरीदने से इनकार कर दिया है. इसके कारण जिले के हजारों छोटे चाय किसानों और बागान मालिकों के सामने रोजी-रोटी का सवाल पैदा हो गया है.

असमंजस में किसान, रुकी चाय पत्तियों की तोड़ाई

किशनगंज जिले के अधिकांश छोटे चाय उत्पादक अपनी हरी चाय पत्तियां उत्तर बंगाल (पश्चिम बंगाल) की बॉटलीफ फैक्ट्रियों को सप्लाई करते हैं. खरीद पर अनिश्चितता के कारण कई किसानों ने बागानों में तैयार पत्तियों की तोड़ाई रोक दी है:

  • फसल खराब होने का डर: चाय पत्तियों को तैयार होने के बाद ज्यादा समय तक पौधों पर नहीं छोड़ा जा सकता. तोड़ाई के बाद यदि फैक्ट्रियां खरीद से मना कर देती हैं, तो कुछ ही घंटों में पूरी उपज बेकार हो जाएगी और मजदूरी का खर्च भी डूब जाएगा.
  • खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता की दलील: NBTPA का कहना है कि भारतीय चाय की अंतरराष्ट्रीय बाजार में साख और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए यह कड़ा कदम उठाना अनिवार्य है.

"बिना तैयारी और जांच सुविधा के नियम थोपना गलत" — चाय किसान

स्थानीय किसानों का कहना है कि वे गुणवत्ता मानकों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिना जागरूकता, प्रशिक्षण और स्थानीय स्तर पर MRL जांच प्रयोगशाला (Lab) के इस नियम को लागू करना उनके साथ अन्याय है.

प्रमुख चाय किसानों की प्रतिक्रियाएँ:

  • संजय साह: "बागान में पत्तियां पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन खरीदार न मिलने के डर से तोड़ाई रोकनी पड़ी है. पत्ती नहीं बिकी तो सालभर की मेहनत पर पानी फिर जाएगा."
  • सूरज गुप्ता: "हम छोटे किसानों के पास MRL जांच कराने का न साधन है और न ही खर्च उठाने की क्षमता. सरकार और टी बोर्ड पहले स्थानीय स्तर पर जांच की व्यवस्था करे."
  • ओमप्रकाश गुप्ता: "सालों से जो दवाएं बाजार में मिल रही थीं, हम उनका उपयोग कर रहे थे. पहले सरकार बताए कि कौन-सी दवाएं प्रतिबंधित हैं और कौन-सी अनुमोदित."
  • आशीष जैन व संदीप जैन: "किसानों को बिना तैयारी के इस दायरे में लाना ठीक नहीं है. समय पर तोड़ाई न होने से फसल बर्बाद हो जाएगी, टी बोर्ड को तत्काल राहत देनी चाहिए."

गलगलिया के बागान मालिकों ने भी जताई गहरी चिंता

गलगलिया और आसपास के चाय बागान मालिकों ने भी इस स्थिति पर आक्रोश और चिंता व्यक्त की है:

बागान मालिकउनका पक्ष / मांग
गणेश रायखरीद बंद होने की आशंका से तोड़ाई ठप है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है.
संजय रायMRL जांच की व्यवस्था जिला/प्रखंड स्तर पर होनी चाहिए, दूर जाकर जांच कराना असंभव है.
फारुक आजमबिना जागरूकता और प्रशिक्षण दिए सीधे खरीद रोक देना पूरी तरह अनुचित है.
लक्ष्मी सिंहसमय पर तोड़ाई न होने से गुणवत्ता खराब होगी और लाखों रुपये की फसल बर्बाद हो जाएगी.

चाय उद्योग और मजदूरों की आजीविका पर मंडराया संकट

चाय उत्पादकों का स्पष्ट कहना है कि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है, लेकिन इसके लिए किसानों को:

  1. अनुमोदित एवं प्रतिबंधित कीटनाशकों की स्पष्ट सूची दी जाए,
  2. स्थानीय स्तर पर सस्ती/निःशुल्क MRL टेस्ट लैब स्थापित की जाए,
  3. जैविक और वैकल्पिक कीटनाशकों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाए.

यदि सरकार और टी बोर्ड ने जल्द ही इसका कोई बीच का रास्ता या समाधान नहीं निकाला, तो इसका असर न केवल किसानों की आय पर पड़ेगा, बल्कि किशनगंज के पूरे चाय उद्योग और इससे जुड़े हजारों खेत मजदूरों की आजीविका पूरी तरह ठप हो जाएगी.


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लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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