मानिकपुर पुल धंसने के बाद बैरियर बना नई मुसीबत, 20 किमी लंबा चक्कर काटने को मजबूर लोग

Manikpur Bridge Issue: मानिकपुर पुल धंसने के बाद लगाए गए बैरियर से स्कूल बस, पिकअप और मालवाहक वाहनों की आवाजाही बंद है. लोग 20 किमी लंबा चक्कर काटने को मजबूर हैं.

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Manikpur Bridge Issue: मानिकपुर के समीप पुल धंसने के बाद ठाकुरगंज-मुरारीगच्छ मुख्य सड़क पर यातायात संकट गहराता जा रहा है. पुल की सुरक्षा के लिए लगाए गए कम ऊंचाई वाले बैरियर के कारण इस मार्ग से अब केवल ट्रैक्टरों की आवाजाही हो रही है, जबकि पिकअप, मिनी ट्रक, स्कूल बस और अन्य मालवाहक वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद हो गया है. इससे आम लोगों के साथ-साथ किसान, व्यापारी और छात्र-छात्राएं सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं.

स्कूली बच्चों को 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही

बैरियर लगाए जाने के बाद इस मार्ग से गुजरने वाली स्कूल बसों को अब विधाननगर, सोनापुर और तैयबपुर होकर करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है. इससे बच्चों के स्कूल पहुंचने में अधिक समय लग रहा है. साथ ही परिवहन लागत बढ़ने से अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है.

किसानों और व्यापारियों पर पड़ा सीधा असर

यह सड़क क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों की प्रमुख कड़ी मानी जाती है. चाय, अनानास, मक्का सहित विभिन्न कृषि उत्पादों की ढुलाई वर्षों से इसी मार्ग से होती रही है. अब मालवाहक वाहनों की आवाजाही बंद होने से किसानों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे परिवहन खर्च बढ़ गया है और स्थानीय व्यापार भी प्रभावित होने लगा है.

डायवर्सन को लेकर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब इसी मार्ग से बालू खदान के भारी वाहन गुजरते हैं, तो अब तक चौड़ा और मजबूत डायवर्सन क्यों नहीं बनाया गया. उनका सवाल है कि यदि भारी वाहनों के लिए रास्ता उपलब्ध कराया जा सकता है, तो स्कूल बसों, पिकअप और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई.

ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि पुल की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर पूरे इलाके की यातायात व्यवस्था बाधित नहीं होनी चाहिए. लोगों ने पथ निर्माण विभाग से बैरियर की ऊंचाई बढ़ाने, चौड़ा एवं मजबूत डायवर्सन बनाने तथा स्कूल बसों और आवश्यक वाहनों की आवाजाही जल्द बहाल करने की मांग की है. उनका कहना है कि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर शिक्षा, कृषि, व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर और गंभीर होगा.

लोगों के मन में उठ रहे हैं ये सवाल

  • पुल धंसने के बाद अब तक स्थायी या चौड़ा डायवर्सन क्यों नहीं बनाया गया?
  • कम ऊंचाई का बैरियर लगाने से पहले स्थानीय यातायात की जरूरतों का आकलन क्यों नहीं किया गया?
  • जब इसी मार्ग से बालू खदान के भारी वाहन गुजर रहे हैं तो स्कूल बसें और पिकअप वाहन क्यों नहीं?
  • आम लोगों की परेशानी दूर करने के लिए विभाग की अगली कार्ययोजना क्या है?

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By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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