ठाकुरगंज. एलपीजी आपूर्ति के सरकारी दावों व जमीनी हकीकत के बीच की खाई एक बार फिर उजागर हो गयी है. मिड-डे-मील योजना, जिसे बच्चों के पोषण व शिक्षा से जोड़ा जाता है, अब एलपीजी की कमी के कारण पुराने दौर में लौटती दिख रही है. ठाकुरगंज प्रखंड के तीन दर्जन स्कूलों में लकड़ी से खाना बनाते देखा जा रहा है. इससे रसोइए परेशान है. हालांकि कागजों में एलपीजी के चूल्हे पर भोजन पकाने की बात होती है. वहीं हकीकत में लकड़ी के चूल्हे व धुएं के बीच खाना बन रहा है.
बताते चले खाड़ी में गतिरोध के बाद रसोई गैस की समस्या को देखते हुए शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया कि एलपीजी की अनुपलब्धता की स्थिति में लकड़ी/कोयला से वैकल्पिक रूप से भोजन पकाने का निर्देश दिया. हालांकि इसे अस्थायी व्यवस्था बताया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह अब सामान्य व्यवस्था बनती जा रही है. एलपीजी एजेंसी के नित्य नए नियमों से परेशान हो चुके कई स्कूलों के हेडमास्टर तो अब मध्याह्न भोजन योजना से छुट्टी चाहने लगे है. प्रखंड के विभिन्न इलाकों से आई तस्वीरों ने रसोई गैस की उपब्धता की पोल खोल दी है. स्कूलों में ईंटों के अस्थायी चूल्हा बनाकर बड़े बर्तनों में खाना बनाया जा रहा है. रसोइयों को धुएं व जोखिम भरे माहौल में काम करना पड़ रहा है. पूरी प्रक्रिया साफ-सफाई व पोषण मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करती है. विशेषज्ञों के अनुसार लकड़ी के धुएं से श्वसन संबंधी बीमारियां, भोजन में राख/धूल मिलना रसोइयों व बच्चों दोनों के लिए असुरक्षित वातावरण पैदा करता है.धुएं में मिड-डे-मील. ठाकुरगंज के स्कूलों से एलपीजी गायब, लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा खाना
ठाकुरगंज के स्कूलों से एलपीजी गायब, लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा खाना
