बारिश नहीं होने से चाय की खेती पर पड़ रहा प्रतिकूल असर

लंबे समय से क्षेत्र में बारिश नहीं होने का असर चाय की खेती पर भी पड़ने लगा है

ठाकुरगंज लंबे समय से क्षेत्र में बारिश नहीं होने का असर चाय की खेती पर भी पड़ने लगा है. इससे अब तक दस प्रतिशत उन्नत चाय उत्पादन प्रभावित हुआ है. यदि पूरी फ़रवरी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन में 25 प्रतिशत प्रभाव पड़ जाएगा. बरसात नहीं होने के कारण चाय के पौधे की सबसे ऊपर की पत्ती प्रभावित होने लगी है. इन पत्तियों से बनने वाली चाय को प्रथम फ्लस की चाय कहा जाता है. बताते चले पिछली बार नवंबर महीने की शुरुआत में बारिश हुई थी. इसके बाद से लगभग तीन महीनों से शीतकाल में कोई बारिश नहीं हुई है. इस स्थिति के कारण इस बार क्षेत्र में प्रीमियम क्वालिटी की फर्स्ट फ्लश चाय का उत्पादन कितना होगा, इसे लेकर बागान प्रबंधन गहरे संशय में हैं. इसके साथ ही उनकी चिंता भी लगातार बढ़ती जा रही है. इस बाबत कई चाय उत्पादक किसानों ने बताया की आमतौर पर सर्दियों में हल्की बारिश होती है, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहती है. इससे मुख्य सीजन शुरू होने से पहले नई कोपलों के निकलने की प्रक्रिया तेज होती है .अब सभी की नजर बारिश पर टिकी हुई है, हालांकि मौसम विभाग भी बहुत ज्यादा आशावादी नहीं है. इस बाबत चाय उत्पादक किसान संतोष साह ने बताया कि कृत्रिम सिंचाई केवल पौधों को जीवित रखने के लिए है, लेकिन नई पत्तियों के लिए प्राकृतिक बारिश का कोई विकल्प नहीं है. वही जयन्तो लाहिड़ी कहते है कि इस बार एकमात्र सकारात्मक पहलू दिन के तापमान में वृद्धि है. वर्ष 2025 के जनवरी के मध्य में जहां औसत तापमान 23 डिग्री सेल्सियस था, वहीं इस वर्ष यह 5–6 डिग्री बढ़ गया है. पत्तियों की बढ़वार के लिए अधिक तापमान एक महत्वपूर्ण कारक है. हालांकि निराशा की बात यह है कि पिछले साल 13 जनवरी को लगभग 1 इंच बारिश हुई थी, जबकि इस साल अब तक एक बूंद भी नहीं गिरी है . वही चुरली के अरुण सिंह ने बताया कि अन्य वर्षों में 20 फरवरी तक चाय बागानों में नई कोपलें आ जाती हैं. उस समय सीमा तक पहुंचने में अभी करीब तीन सप्ताह का समय बाकी है. यदि इस बीच बारिश हो जाए तो राहत मिलेगी, अन्यथा गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है. इस वर्ष टी बोर्ड ने शीतकाल में उत्पादन बंद रखने को लेकर कोई विशेष तिथि घोषित नहीं की थी और यह निर्णय बागानों पर ही छोड़ दिया गया था.इसी तरह नए सीजन की शुरुआत की तारीख भी बागान प्रबंधन पर निर्भर है. लेकिन यदि नई पत्तियां समय पर नहीं आई, तो नए सीजन की संभावित तिथि आगे खिसक सकती है.

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By AWADHESH KUMAR

AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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