ट्रैक्टर-ट्रॉली पर ढलाई मशीन के साथ जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे मजदूर, मई के हादसे से भी नहीं लिया सबक

ठाकुरगंज-किशनगंज मार्ग पर ट्रैक्टर-ट्रॉली में भारी मशीन के साथ बेपरवाह मजदूर जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं. मई में हुए एक दर्दनाक हादसे से भी लोगों ने सबक नहीं लिया है, जिससे सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

ठाकुरगंज-किशनगंज मार्ग पर अक्सर सड़क पर दौड़ती ट्रैक्टर-ट्रॉली में भारी-भरकम ढलाई मशीन और उसके साथ ठंस-ठंस कर बैठे मजदूर दिखाई दे जाते हैं. देखने में भले ही यह एक सामान्य तस्वीर लगे, लेकिन जरा सी भी चूक इस सफर को किसी भयानक हादसे में बदल सकती है. हाल ही में सामने आई एक तस्वीर में देखा जा सकता है कि ढलाई मशीन के साथ ट्रॉली पर कई मजदूर जान जोखिम में डालकर बैठे हुए हैं, वहीं ट्रैक्टर पर भी चालक के अलावा अन्य लोग सवार हैं.

मशीन की ढुलाई या मजदूरों की मजबूरी?

निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली भारी ढलाई मशीन को ट्रैक्टर-ट्रॉली से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना आम बात है. लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है जब उसी ट्रॉली को मजदूरों को ढोने के लिए भी इस्तेमाल किया जाने लगता है. लोहे की भारी मशीनरी के बीच बैठे मजदूरों के लिए न तो कोई सुरक्षित सीट होती है और न ही आपात स्थिति में बचाव की कोई व्यवस्था. चलती ट्रॉली में अचानक ब्रेक लगने, सड़क के गड्ढों या मोड़ पर संतुलन बिगड़ने की स्थिति में मजदूर सीधे नीचे गिर सकते हैं, जिससे गंभीर चोट या जान जाने तक का खतरा बना रहता है.

मई महीने का खौफनाक हादसा भी भूल गए लोग

यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर है क्योंकि मई महीने में ही ठाकुरगंज क्षेत्र में एक ट्रैक्टर और कंटेनर की भीषण टक्कर में एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उस हादसे में भी मजदूर ट्रैक्टर पर ही सवार होकर काम पर जा रहे थे. उस घटना ने मजदूरों की सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े किए थे, लेकिन इसके बावजूद अब तक इस दिशा में कोई सबक नहीं लिया गया है.

कुछ मिनटों की सुविधा और पैसे बचाने का जानलेवा खेल

अक्सर ठेकेदारों द्वारा अलग वाहन का खर्च बचाने या निर्माण स्थल पर जल्दी पहुंचने के लिए मजदूरों को माल ढोने वाली ट्रॉली पर ही बैठा दिया जाता है. सड़कों पर भारी और तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही के बीच ऐसा सफर जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है. यदि तेज रफ्तार में वाहन अनियंत्रित हुआ, तो मशीन के भारी-भरकम वजन के नीचे दबने से मजदूरों को संभलने का एक मौका तक नहीं मिलेगा.

क्या हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?

तस्वीरें सामने आने के बाद सड़क सुरक्षा और परिवहन विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. स्थानीय लोगों की मांग है कि ऐसे खतरनाक तरीके से मालवाहक वाहनों पर इंसानों को ढोने वालों के खिलाफ नियमित जांच अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाए. मई माह की घटना एक बड़ी चेतावनी थी और वर्तमान स्थितियां उसी खतरे की ओर दोबारा इशारा कर रही हैं. अब देखना यह होगा कि प्रशासन किसी नए हादसे का इंतजार करता है या समय रहते सख्त कदम उठाता है.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >