किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट
Kishanganj Weather: उत्तर-पूर्वी बिहार के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले किशनगंज जिले में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मौसम ने एक ऐसी कड़क करवट ली है कि लोग राहत की सांस ले रहे हैं. रविवार और सोमवार की दरमियानी रात को अचानक आसमान में काले कजरारे बादलों की मुस्तैदी बढ़ी और देखते ही देखते पूरा प्रक्षेत्र मूसलाधार बारिश की आगोश में समा गया. सोमवार की सुबह जब कनिष्ठ व वरिष्ठ नागरिकों की आंखें खुलीं, तो कड़े दिन के बजाय ठंडी पुरवैया हवाओं ने उनका स्वागत किया. इस अप्रत्याशित मौसमी बदलाव से न केवल शहरी और ग्रामीण इलाकों का मिजाज सुहाना हो गया है, बल्कि सीमांचल की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी एक नया जीवनदान मिलता हुआ दिखाई दे रहा है.
आधी रात को शुरू हुआ बादलों का तांडव और बदल गया फिजा का मिजाज
किशनगंज जिला मुख्यालय सहित बहादुरगंज और ठाकुरगंज प्रक्षेत्र में पिछले कई दिनों से हवा में आर्द्रता यानी नमी का सूचकांक काफी ऊपर चला गया था. इसके कारण लोग दिन के साथ-साथ रात में भी सफोकेशन और पसीने वाली गर्मी से बुरी तरह फजीहत झेल रहे थे. लेकिन रविवार की देर रात करीब बारह बजे के बाद अचानक वायुमंडलीय दबाव में बड़ा परिवर्तन दर्ज किया गया.
तेज गर्जना के साथ शुरू हुई वर्षा की कड़ियां रातभर रुक-रुक कर जारी रहीं. मूसलाधार बारिश का वेग इतना कड़क था कि सुबह होते-होते कड़ाके की गर्मी पूरी तरह काफूर हो गई और लोग सुबह के समय हल्के चादरों में लिपटे नजर आए. वातावरण में घुली इस ठंडक ने बूढ़े-बुजुर्गों और मासूम बच्चों को एक बड़ी मेडिकल राहत पहुंचाई है.
खेतों में लौटी रौनक, धान की रोपनी के लिए कमान संभालने लगे अन्नदाता
इस झमाझम बारिश ने जहां शहरी कप्तानों को जलजमाव की थोड़ी फजीहत दी है, वहीं ग्रामीण प्रक्षेत्र के किसानों के लिए यह किसी अमृत वर्षा से कम साबित नहीं हो रही है. सीमांचल के इस इलाके में खरीफ फसलों, विशेषकर धान की रोपाई और बिचड़ा तैयार करने का काम पूरी तरह गति पकड़ रहा था, लेकिन पानी की कमी के कारण किसान भाई कृत्रिम सिंचाई पर निर्भर थे.
कृषि वैज्ञानिकों और प्रबुद्ध किसानों का मानना है कि इस प्राकृतिक संबल से खेतों की मिट्टी में कड़क नमी आ गई है. अब कली-मजदूर और किसान बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के अपने धान की रोपाई की कमान मुस्तैदी से संभाल सकते हैं. इस वर्षा को चाय के बागानों के लिए भी संजीवनी बूटी माना जा रहा है, क्योंकि इससे चाय की हरी पत्तियों में एक नई चमक और ताजगी आएगी.
तापमान के सूचकांक में ऐतिहासिक गिरावट और मौसम विभाग का नया बुलेटिन
मौसम विज्ञान केंद्र के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोमवार की अलसुबह किशनगंज और बहादुरगंज प्रक्षेत्र का न्यूनतम तापमान लुढ़क कर 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास संधारित किया गया, जो सामान्य से काफी कम है. हालांकि, दिन चढ़ने के साथ ही बादलों की आवाजाही के बीच अधिकतम तापमान 33 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है.
मौसम कप्तानों के पूर्वानुमान बुलेटिन के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आ रही कड़क मानसूनी हवाओं के कारण अगले 24 घंटों के दौरान भी पूरे किशनगंज जिले में गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना पूरी तरह मजबूत बनी हुई है. मौसम विभाग ने कई पॉकेट्स में वर्षा की संभावना को 55 से 65 प्रतिशत तक आंका है, जिसका साफ मतलब है कि अभी दो-तीन दिनों तक कड़क धूप के तेवर सुस्त ही रहेंगे.
वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी, आपदा प्रबंधन ने दी सुरक्षित रहने की सलाह
भले ही इस मौसमी करवट ने आम जनजीवन को एक सुखद अहसास दिया है, लेकिन इसके साथ आने वाले आसमानी खतरों को लेकर भी कड़क चेतावनी जारी की गई है. राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम वैज्ञानिकों ने कनिष्ठ व वरिष्ठ नागरिकों से विशेष अपील की है कि मेघ गर्जन और तेज आंधी के समय किसी भी परिस्थिति में बड़े पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें.
विशेषकर खेतों में काम करने वाले किसान भाइयों को हिदायत दी गई है कि जैसे ही आसमान में कड़कने की आवाज सुनाई दे, वे तुरंत पक्के मकानों या सुरक्षित स्थानों की ओर रुख करें. बहरहाल, इस सुखद बारिश के बाद पूरा किशनगंज सुहाने मौसम का लुत्फ उठा रहा है और हर तरफ छाई हरियाली लोगों के मन को एक असीम शांति प्रदान कर रही है.
