गैस संकट में गांवों में लौटा मिट्टी का चूल्हा, महिलाओं को मिल रहा रोजगार

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं मिट्टी, गोबर और भूसे के मिश्रण से हाथों से चूल्हे तैयार कर रही हैं. स्थानीय बाजारों में एक मिट्टी का चूल्हा 80 से 100 रुपये तक में बिक रहा है. मांग बढ़ने के कारण कई महिलाएं प्रतिदिन कई चूल्हे बनाकर बाजारों और आसपास के गांवों में बेच रही हैं.

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट:

रसोई गैस की किल्लत और बढ़ती महंगाई के बीच सीमांचल के ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर पारंपरिक मिट्टी के चूल्हों की मांग बढ़ने लगी है. ठाकुरगंज समेत आसपास के गांवों में जिन देसी चूल्हों को आधुनिक दौर में गैस और इलेक्ट्रिक उपकरणों ने लगभग खत्म कर दिया था, वही अब ग्रामीण रसोई का सहारा बनते जा रहे हैं.

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं मिट्टी, गोबर और भूसे के मिश्रण से हाथों से चूल्हे तैयार कर रही हैं. स्थानीय बाजारों में एक मिट्टी का चूल्हा 80 से 100 रुपये तक में बिक रहा है. मांग बढ़ने के कारण कई महिलाएं प्रतिदिन कई चूल्हे बनाकर बाजारों और आसपास के गांवों में बेच रही हैं.

ग्रामीण परिवारों का कहना है कि गैस सिलेंडर समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और लगातार बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. ऐसे में लकड़ी और उपले से चलने वाले मिट्टी के चूल्हे सस्ता और आसान विकल्प बनकर उभरे हैं. खासकर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार फिर से पारंपरिक चूल्हों का उपयोग करने लगे हैं.

महिलाओं के लिए बना आय का जरिया

चूल्हा बनाने वाली महिलाओं ने बताया कि पहले कभी-कभार ही इस काम की मांग होती थी, लेकिन अब लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं. इससे उन्हें घर बैठे अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी मिल रहा है. कई गांवों में लोग एक साथ दो से तीन चूल्हे खरीदकर घर में रख रहे हैं.

परंपरा और जरूरत का संगम

विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी का चूल्हा केवल खाना पकाने का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और आत्मनिर्भर जीवनशैली का हिस्सा भी रहा है. हालांकि धुएं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण लोग धीरे-धीरे गैस चूल्हों की ओर बढ़े थे, लेकिन मौजूदा हालात ने लोगों को फिर पुराने विकल्पों की ओर लौटने पर मजबूर कर दिया है.

इन दिनों गांवों में घरों के बाहर सूखते मिट्टी के चूल्हे और उनसे उठता धुआं यह साफ संकेत दे रहा है कि महंगाई और गैस संकट के बीच ग्रामीण जीवन फिर से पुराने दौर की ओर लौटता नजर आ रहा है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Shruti Kumari

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >