किशनगंज. शिक्षक दिवस के अवसर पर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने प्रदेश के करीब छह लाख शिक्षकों के नाम विशेष पत्र जारी कर उन्हें शुभकामनाएं दीं. 5 सितंबर को जारी पत्र में शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों को समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए उनके योगदान को नमन किया. उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला, संस्कारों का संवाहक, व्यक्तित्व का निर्माता और राष्ट्र निर्माण का प्रथम शिल्पकार होता है.
गुरु के सर्वोच्च स्थान और डॉ. राधाकृष्णन को किया याद
शिक्षा मंत्री ने पत्र की शुरुआत भारतीय संस्कृति में गुरु के सर्वोच्च स्थान के उल्लेख से की. उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की पावन स्मृति को नमन करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह कृतज्ञता, सम्मान और आत्ममंथन का भी अवसर है.
बिहार की ज्ञान परंपरा को फिर स्थापित करने पर जोर
मिथिलेश तिवारी ने बिहार की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार केवल एक भौगोलिक प्रदेश नहीं, बल्कि भारत की महान ज्ञान परंपरा की भूमि है. इस धरती ने सदियों से शिक्षा, दर्शन, अध्यात्म और ज्ञान के क्षेत्र में पूरी दुनिया को प्रेरित किया है.
उन्होंने नालंदा और प्राचीन शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि देश-विदेश से विद्यार्थी यहां ज्ञान अर्जित करने आते थे और नालंदा ने बिहार को विश्वस्तरीय शिक्षा एवं ज्ञान का केंद्र बनाया.
आधुनिक शिक्षा में संस्कार और भारतीय ज्ञान परंपरा का मेल जरूरी
शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज आवश्यकता है कि नालंदा की उसी ज्ञान परंपरा को आधुनिक युग की जरूरतों के अनुरूप फिर से स्थापित किया जाए. इसके लिए बिहार में ऐसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिसमें ज्ञान के साथ संस्कार, विज्ञान के साथ विवेक, तकनीक के साथ मानवीय संवेदना और आधुनिकता के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई शामिल हो.
शिक्षकों को बताया बिहार के भविष्य का निर्माता
मंत्री ने शिक्षकों को बिहार के भविष्य का निर्माता बताते हुए कहा कि शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि तब होती है, जब वह विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही दिशा दे, उनके भीतर आत्मविश्वास जगाए और उनके सपनों को उड़ान देने में सहयोग करे. उन्होंने कहा कि विद्यार्थी केवल विषय का ज्ञान ही नहीं सीखते, बल्कि शिक्षक के व्यवहार, विचार, अनुशासन, संवेदनशीलता और व्यक्तित्व से भी प्रभावित होते हैं. इसलिए शिक्षक का प्रत्येक शब्द, कर्म और व्यवहार विद्यार्थियों के जीवन पर स्थायी प्रभाव डालता है.
विकसित भारत 2047 के संकल्प में शिक्षा की अहम भूमिका
पत्र में ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा को केंद्रीय भूमिका प्रदान की है. ज्ञान, नवाचार, कौशल, अनुसंधान और मानवीय मूल्यों के आधार पर भारत को विश्व का नेतृत्व करने वाला राष्ट्र बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है.
हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा देने पर जोर
शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा मिले, इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है. विद्यालयों में विज्ञान, गणित और तकनीक के प्रति रुचि विकसित करने के साथ कौशल एवं व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा. इसके अलावा बच्चों को भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे.
शिक्षकों को सम्मान और संवेदनशीलता का भरोसा
पत्र के अंत में शिक्षा मंत्री ने बिहार के सभी शिक्षकों को मान-सम्मान और गरिमा के साथ उनकी आवश्यकताओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता का भरोसा दिलाया. उन्होंने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों से शिक्षा के क्षेत्र में नए संकल्प के साथ मिलकर आगे बढ़ने का आह्वान किया.
