मुख्य बातें:
किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट
Kishanganj Monsoon Failure: किशनगंज जिले में मॉनसूनी सीजन की शुरुआत के बीच एक बेहद चिंताजनक मौसमी बदलाव सामने आया है. जिले में मानसून की आधिकारिक दस्तक के बावजूद शनिवार (04 जुलाई 2026) की सुबह सातों प्रखंडों में सूखे जैसी स्थिति बनी रही. सुबह 07:45 बजे तक जिला प्रशासन और मौसम विभाग के सभी स्वचालित मौसम केंद्रों (AWS) पर 0.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई. आसमान में बादलों की आवाजाही के बाद भी बारिश न होने से पूरे जिले में उमस और चिपचिपी गर्मी का दोहरा प्रकोप देखने को मिल रहा है. इस अप्रत्याशित शुष्क मौसम (Dry Spell) ने कृषि कार्यों, विशेषकर धान की रोपाई में जुटे अन्नदाताओं की रातों की नींद उड़ा दी है.
सातों प्रखंडों का तापमान और आर्द्रता विवरण
- कोचाधामन (सबसे गर्म प्रखंड): कोचाधामन शनिवार सुबह पूरे जिले में सबसे तपता हुआ इलाका रहा, जहां का तापमान 33.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. यहां हवा में आर्द्रता (नमी) 72 प्रतिशत दर्ज की गई.
- ठाकुरगंज (सबसे ठंडा प्रखंड): ठाकुरगंज में पारा सबसे कम 30.9 डिग्री सेल्सियस रहा. हालांकि, यहां हवा में सबसे अधिक 93 प्रतिशत की आर्द्रता होने के कारण लोगों को सुबह से ही पसीने से तर-बतर करने वाली उमस झेलनी पड़ी.
- पोठिया: इस प्रखंड में भी ठाकुरगंज की तरह ही 93 प्रतिशत की रिकॉर्ड आर्द्रता मापी गई, जबकि यहां का तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
- दिघलबैंक और बहादुरगंज: इन दोनों सीमावर्ती प्रखंडों में समान रूप से 31.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. बहादुरगंज में नमी 83% और दिघलबैंक में 87% रही, लेकिन बारिश का खाता दोनों जगह नहीं खुला.
- किशनगंज नगर: जिला मुख्यालय व शहरी क्षेत्र में तापमान 31.8 डिग्री सेल्सियस तथा आर्द्रता 87 प्रतिशत रही. सुबह के समय हल्की पुरवा हवा चलने के बावजूद लोगों को उमस भरी गर्मी से कोई राहत नहीं मिल सकी.
- टेढ़ागाछ: इस ग्रामीण प्रखंड में सुबह का तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस और आर्द्रता 89 प्रतिशत दर्ज की गई. यहां भी वर्षा का आंकड़ा पूरी तरह शून्य रहा.
खेतों में सूख रही मिट्टी, कृषि क्षेत्र पर संकट के बादल
कृषि वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल से सटे होने के बावजूद किशनगंज में मानसून फिलहाल अपनी अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पा रहा है. खेतों में धान की बिचड़े तैयार हैं और रोपाई का काम जोरों पर होना चाहिए था, लेकिन पानी न होने से मिट्टी सूख रही है. यदि अगले 48 से 72 घंटों के भीतर जिले में झमाझम बारिश नहीं होती है, तो किसानों की पूरी फसल और सालाना लागत डूबने के कगार पर पहुंच जाएगी.
Kishanganj Monsoon Failure: इनवर्टर फेल, ठप पड़े हैं पंखे; आम जनजीवन पूरी तरह त्रस्त
बारिश के अभाव और हवा में 93 फीसदी तक पहुंची भारी नमी ने आम नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है. उमस के कारण घरों के भीतर लगे पंखे और कूलर भी फेल साबित हो रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में बिजली की लचर आपूर्ति और ओवरलोडिंग के कारण बार-बार हो रही कटौती ने समस्या को और बढ़ा दिया है, जिससे इनवर्टर भी चार्ज नहीं हो पा रहे हैं. मौसम विभाग का अनुमान है कि जब तक बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाएं जिले में स्थानीय कम दबाव का क्षेत्र नहीं बनातीं, तब तक लोगों को इस भीषण चिपचिपी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कम है.
