80 लाख की लागत से बना जलमिनार बना शोभा की वस्तु

करीब 88 लाख रुपये की लागत से वर्ष 2013 में निर्मित यह जलमीनार अब पूरी तरह से शोपीस बनकर रह गया है.

टेढ़ागाछ. बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र के टेढ़ागाछ प्रखंड मुख्यालय स्थित जलमीनार की स्थिति इन दिनों अत्यंत दयनीय हो चुकी है. करीब 88 लाख रुपये की लागत से वर्ष 2013 में निर्मित यह जलमीनार अब पूरी तरह से शोपीस बनकर रह गया है. इस जलमीनार का निर्माण प्रखंड मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था. लेकिन यह आज तक पूरा नहीं हो सका. स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के बाद से इस जलमीनार से अब तक एक बूंद भी शुद्ध जल की आपूर्ति नहीं हुई है. स्थिति यह है कि कभी जनसुविधा के प्रतीक रहे इस ढांचे के चारों ओर अब झाड़-झंखाड़ और खरपतवार उग आए हैं. परिसर गंदगी और उपेक्षा का शिकार हो चुका है. ग्रामीणों ने इसे भ्रष्टाचार और लापरवाही का प्रतीक बताते हुए कड़ा रोष व्यक्त किया है. पूर्व प्रखंड प्रमुख कैसर रजा ने इस मुद्दे पर गहरी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि यह जनता के पैसे की खुली बर्बादी है. निर्माण के बाद से आज तक किसी ने इसकी सुध नहीं ली. उन्होंने जिला पदाधिकारी से आग्रह किया है कि इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर संज्ञान में लें और जलमीनार को शीघ्र चालू कराने के निर्देश जारी करें, ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिल सके. वहीं, स्थानीय निवासियों ने बताया कि हर वर्ष इस ढांचे की हालत और खराब होती जा रही है. कभी पाइपलाइन टूटी तो कभी मोटर जल गई, लेकिन मरम्मत या रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण आज भी लोगों को पेयजल के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ता है.जनता को अब उम्मीद है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस उपेक्षित जलमीनार की मरम्मत कर इसे फिर से चालू करेंगे. यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं.एक दशक बाद भी बंद पड़े इस जलमीनार ने सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है — जहां करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता आज भी प्यासे हैं.

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By AWADHESH KUMAR

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