एनजीओ इंस्ट्रक्टर के भरोसे चल रहा स्कूलों का आइसीटी लैब
सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्थापित आइसीटी लैब की जमीनी हकीकत अब गंभीर सवालों के घेरे में है
प्रशिक्षित कंप्यूटर शिक्षक के आभाव में विभाग का उद्देश्य हो रहा विफल
ठाकुरगंज.
सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्थापित आइसीटी लैब की जमीनी हकीकत अब गंभीर सवालों के घेरे में है. लाखों रुपये खर्च कर बनाये गये इन लैबों में न तो पर्याप्त संसाधन है और न ही स्थायी व प्रशिक्षित कंप्यूटर शिक्षक. परिणामस्वरूप पूरी व्यवस्था एनजीओ द्वारा बहाल इंस्ट्रक्टर के भरोसे चल रही है. शुक्रवार को उत्क्रमित उच्च विद्यालय लोधा के आइसीटी लैब में एक-एक कंप्यूटर पर दो से पांच बच्चे बैठे दिखे और ज्यादातर ग्रुप में बच्चे कंप्यूटर पर कार्टून बनाते दिखे. डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खुली आइसीटी लैब बच्चों के मनोरंजन का साधन बनती दिखी. प्रखंड के कई स्कूलों में नियमित कंप्यूटर शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गयी है. इसके स्थान पर आउटसोर्स व्यवस्था के तहत एनजीओ इंस्ट्रक्टर लगाये गये हैं, जिनकी जवाबदेही तय नहीं है. इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संभव नहीं हो पा रहा. जानकारों का मानना है कि आइसीटी लैब जैसी महत्वपूर्ण पहल को अस्थायी व्यवस्था के भरोसे छोड़ना शिक्षा प्रणाली की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है. यदि छात्रों को सही मार्गदर्शन और पर्याप्त संसाधन नहीं मिलेंगे, तो यह पूरी योजना केवल कागजों और फोटो तक सीमित रह जायेगी. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार डिजिटल इंडिया का सपना दिखा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर बच्चों को बुनियादी कंप्यूटर शिक्षा तक सही तरीके से नहीं मिल पा रही. लोगों ने मांग की है कि नियमित और प्रशिक्षित कंप्यूटर शिक्षक की नियुक्ति स्कुलो में हो. आइसीटी लैब की नियमित मॉनिटरिंग और मूल्यांकन किया जाय.