– गर्भधारण के तीसरे से नोवें महीने तक चार जांच मां और नवजात के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य
किशनगंजप्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत बुधवार को जिले के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में गर्भवती महिलाओं की व्यापक प्रसव पूर्व जांच की गई. मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से आयोजित इस विशेष अभियान में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं शामिल हुई. चिकित्सकों ने रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, वजन, मूत्र परीक्षण, भ्रूण की वृद्धि सहित अन्य जांचें की गई. गर्भवती महिलाओं को आवश्यक दवाएं और पोषण से जुड़ी सलाह भी दी गई. जिला पदाधिकारी विशाल राज ने कहा कि सभी गर्भवती महिलाओं की शत-प्रतिशत प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. इस अभियान का उद्देश्य यह है कि हर गर्भवती महिला को समय पर जांच, उचित इलाज और संस्थागत प्रसव से जोड़ना है.
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि गर्भावस्था या प्रसव के दौरान मां और शिशु की मृत्यु को रोकने तथा उन्हें समय पर उचित इलाज उपलब्ध कराने के लिए हर महीने की नौ और 21 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया जाता है. उन्होंने बताया कि कोई भी गर्भवती महिला अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में पंजीयन कराकर तीसरे महीने से लेकर नौंवे महीने तक चार प्रसव पूर्व जांच अवश्य कराए. इन जांचों के दौरान आवश्यक दवाएं, परामर्श और परीक्षण पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं. डॉ. चौधरी ने कहा कि “इन जांचों के माध्यम से चिकित्सक गर्भावस्था में संभावित जटिलताओं की समय से पहचान कर उचित चिकित्सकीय व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं.आवश्यक जांच और संस्थागत प्रसव से घटेगी मातृ मृत्यु दर
महिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शबनम यास्मीन ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान की जाने वाली चार प्रसव पूर्व जांच प्रसव के समय होने वाली जटिलताओं को काफी हद तक कम कर देती है. उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण प्रसव पूर्व जांच न करवाने से उच्च जोखिम गर्भधारण की पहचान समय पर नहीं हो पाती, जिससे प्रसव के दौरान गंभीर जटिलता की संभावना बढ़ जाती है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
