गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार संध्या किशनगंज जिले के ठाकुरगंज अंतर्गत आश्रम पाड़ा स्थित 'हिंदू मिलन मंदिर' में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ गुरु पूजन का आयोजन किया गया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया. पूरे कार्यक्रम के दौरान पूरा मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और गुरु भक्ति के गीतों से गुंजायमान रहा.
"गुरु पूर्ण हैं और शेष सब अपूर्ण": फटिक महाराज
कार्यक्रम के दौरान फटिक महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा:
"गुरु के बिना सच्चे ज्ञान की प्राप्ति असंभव है. गुरु की पूजा करने मात्र से संसार के सभी देवी-देवताओं की पूजा का फल स्वयं प्राप्त हो जाता है, क्योंकि गुरु स्वयं पूर्ण हैं और उनके बिना सब कुछ अपूर्ण है. गुरु केवल अक्षर ज्ञान या शिक्षा नहीं देते, बल्कि शिष्य को सही-गलत का बोध कराकर उसके जीवन को सार्थक बनाते हैं."
उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की नई पीढ़ी तक गुरु और शिक्षक के इस सनातन महत्व को पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है.
महर्षि वेदव्यास की जयंती और आषाढ़ पूर्णिमा का रहस्य
फटिक महाराज ने व्यास पूर्णिमा का उल्लेख करते हुए बताया कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन ही आदि गुरु महर्षि वेदव्यास का प्राकट्य (जन्म) हुआ था. उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए ही इस तिथि को गुरु पूर्णिमा अथवा 'व्यास पूर्णिमा' के रूप में मनाया जाता है.
उन्होंने पूर्णिमा के चंद्रमा का सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्णिमा का चांद पूर्ण ज्ञान का प्रतीक है, जबकि शिष्य अज्ञानता के बादलों से घिरा होता है. एक सच्चा गुरु ही अपने ज्ञान के प्रकाश से शिष्य के जीवन के उस अंधकार को दूर करता है.
हवन, महाआरती और महाप्रसाद का आयोजन
धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन यज्ञ संपन्न कराया गया. इसके बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से महाआरती में भाग लिया और गुरु महाराज का आशीर्वाद लिया. अंत में श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया.
इस दौरान उपस्थित लोगों ने जीवन भर धर्म, सत्य, सदाचार और गुरु के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया.
