Farakka Water Treaty Bihar: किशनगंज. फरक्का जल संधि को बिहार के हितों के खिलाफ बताते हुए जदयू ने इसके नवीनीकरण का विरोध करने की बात कही है. पार्टी की ओर से इस मुद्दे को लेकर गंगा किनारे बसे जिलों में जन-जागरूकता और जनसंवाद अभियान चलाया जा रहा है. किशनगंज में शुक्रवार को जदयू नेताओं ने प्रेस वार्ता कर फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद कार्यक्रम की जानकारी दी और कहा कि बिहार की जल जरूरतों को ध्यान में रखे बिना किसी भी समझौते का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए.
जदयू नेताओं ने कहा कि वर्ष 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि का असर बिहार पर पड़ रहा है. पार्टी का कहना है कि शुष्क मौसम में गंगा के जल प्रवाह में कमी, किसानों की जरूरत, पेयजल और उद्योगों से जुड़े सवालों को देखते हुए बिहार के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
गंगा किनारे बसे 12 जिलों में जनसंवाद
जदयू विधायक गोपाल अग्रवाल, नगर परिषद अध्यक्ष सह जदयू नेता इंद्रदेव पासवान, जिलाध्यक्ष फैसल अहमद, पूर्व प्रधानमंत्री नौशाद आलम और ठाकुरगंज नगर पंचायत अध्यक्ष सिकंदर पटेल समेत अन्य नेताओं ने कार्यक्रम की जानकारी दी.
नेताओं के अनुसार जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में जनसंवाद किया जा रहा है. इनमें बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार शामिल हैं. अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से हुई है और इसका समापन कटिहार में प्रस्तावित है.
2050 तक बिहार की जल जरूरतों का उठाया मुद्दा
विधायक गोपाल अग्रवाल ने कहा कि जदयू का स्पष्ट मत है कि फरक्का जल संधि बिहार और देश के हित में नहीं है. उन्होंने कहा कि हाल में संसद के मानसून सत्र में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया था.
जदयू नेताओं के अनुसार पार्टी की मांग है कि फरक्का जल संधि का नवीनीकरण नहीं किया जाए. भविष्य में यदि इस विषय पर कोई नया समझौता होता है तो उसमें बिहार की वर्ष 2050 तक की जल जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए.
किसानों और जल जरूरतों पर असर का दावा
नगर परिषद अध्यक्ष इंद्रदेव पासवान ने कहा कि शुष्क मौसम में गंगा का जलस्तर और प्रवाह काफी कम हो जाता है. इसके बावजूद फरक्का से बांग्लादेश को पानी दिए जाने का असर बिहार पर पड़ता है. उन्होंने दावा किया कि इसका प्रभाव किसानों, पेयजल व्यवस्था, उद्योगों और आम लोगों की जरूरतों पर पड़ रहा है.
जदयू जिलाध्यक्ष फैसल अहमद ने फरक्का बराज और जल संधि को बिहार के लिए दोहरी चुनौती बताया. उन्होंने कहा कि एक तरफ गंगा में गाद जमा होने और नदी का तल ऊंचा होने से बाढ़ की समस्या बढ़ने की बात सामने आती है, वहीं शुष्क मौसम में जल संकट का सामना करना पड़ता है.
Farakka Water Treaty Bihar: राष्ट्रीय बहस में मुद्दे को लाने की कोशिश
जदयू जिलाध्यक्ष ने कहा कि फरक्का जल संधि का बोझ बिहार को उठाना पड़ रहा है. इसी वजह से पार्टी इस मुद्दे को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए जन-जागरूकता अभियान चला रही है. उन्होंने दावा किया कि फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद अभियान को लोगों का समर्थन मिल रहा है और पार्टी के प्रयासों से यह विषय राष्ट्रीय विमर्श में आया है.
पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य बिहार की जल जरूरतों और फरक्का जल संधि से जुड़े सवालों को जनता के बीच रखना है. आने वाले दिनों में गंगा किनारे के अन्य जिलों में भी इस मुद्दे पर जनसंवाद जारी रखने की बात कही गयी है.
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