मुख्य बातें:
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Teacher Profile Update: बिहार के सीमांचल प्रक्षेत्र अंतर्गत किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड से शिक्षा विभाग की एक बड़ी और हड़कंप मचाने वाली खबर सामने आई है. करोड़ों रुपये के मासिक वेतन भुगतान और पूरी शिक्षा प्रणाली को डिजिटल कमान से जोड़ने के लिए बनाए गए ‘ई-शिक्षाकोष पोर्टल’ (E-Shikshakosh Portal) पर शिक्षकों की घोर उदासीनता उजागर हुई है. बार-बार दिए गए निर्देशों और विभागीय समीक्षा बैठकों को ठेंगा दिखाने वाले शिक्षकों को सीधे रास्ते पर लाने के लिए शिक्षा विभाग ने अब विधिक रूप से कड़े तेवर अख्तियार कर लिए हैं, जिससे पूरे प्रक्षेत्र के शैक्षणिक गलियारों में खलबली मच गई है.
महज 54% शिक्षकों का डेटा मुस्तैद; 239 विद्यालयों की रिपोर्ट से खुली हकीकत
ई-शिक्षाकोष पोर्टल की इस लचर प्रगति और विभागीय कड़ियों की मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं. ठाकुरगंज प्रखंड के कुल 239 प्रारंभिक, मध्य और उच्च माध्यमिक विद्यालयों से आई लाइव रिपोर्ट ने जिले के वरिष्ठ कप्तानों की नींद उड़ा दी है.
आधिकारिक विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रक्षेत्र के केवल लगभग 54 प्रतिशत कनिष्ठ व वरिष्ठ शिक्षकों ने ही अब तक पोर्टल पर अपनी विधिक प्रोफाइल और सेवा विवरण को सुचारू रूप से अपडेट किया है. शेष बड़ी संख्या में शिक्षकों का पूरा व्यक्तिगत व व्यावसायिक विवरण अब भी लंबित (Pending) पड़ा हुआ है, जिसे विभाग ने प्रशासनिक कमान की बड़ी विफलता माना है.
पत्र संख्या 517 के जरिए अंतिम चेतावनी; एचएम (प्रधानाध्यापक) पर भी गिरेगी गाज
“जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) किशनगंज के सख्त निर्देश पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) ने 18 जून 2026 को आधिकारिक पत्र संख्या 517 जारी कर प्रक्षेत्र के सभी कनिष्ठ शिक्षकों, प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को 24 घंटे का अंतिम लाइव अल्टीमेटम थमा दिया है. इस विधिक आदेश में साफ तौर पर दर्ज है कि यदि निर्धारित समय के भीतर प्रोफाइल त्रुटिहीन रूप से अपडेट नहीं हुई, तो जून 2026 माह का वेतन सुचारू रूप से संधारित नहीं किया जाएगा और उसे तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाएगा.”
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Teacher Profile Update: जवाबदेही तय होने से मचा हड़कंप; डिजिटल कमान की बड़ी परीक्षा
इस बार शिक्षा विभाग ने एक मुख्य रणनीतिक बदलाव करते हुए इस लापरवाही की पूरी जवाबदेही विद्यालय के प्रधानों (हेडमास्टरों) के सिर भी मढ़ दी है. स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कनिष्ठ शिक्षक की प्रोफाइल अधूरी रहने से वेतन रुकता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित प्रधानाध्यापक दोषी माने जाएंगे.
इस कड़े इनपुट के बाद शनिवार सुबह से ही शिक्षकों में अपने विधिक शैक्षणिक दस्तावेज और प्रपत्र जुटाने की लाइव भागदौड़ मची हुई है. प्रक्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि सरकारी वेतन पाने वाले कर्मियों को डिजिटल जवाबदेही के प्रति मुस्तैद होना ही होगा. अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि इस अंतिम 24 घंटे की विसंगतिपूर्ण समय-सीमा में शिक्षक अपना लक्ष्य पूरा कर पाते हैं या जून का वेतन उनके लिए एक बड़ा वित्तीय संकट बन जाता है.
