ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Deoghar Dibrugarh Express: कटिहार–न्यू जलपाईगुड़ी मुख्य रेलखंड पर तकनीकी कारणों और परिचालन संबंधी गतिरोध का खामियाजा आम रेल यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है. शुक्रवार को ट्रेन संख्या 15925 देवघर–डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस को अपने नियमित मार्ग के बजाय परिवर्तित (डायवर्ट) मार्ग से चलाया गया. इस अचानक हुए बदलाव के कारण किशनगंज और अलुआबाड़ी रोड रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का परिचालन और ठहराव पूरी तरह रद्द रहा. नतीजा यह हुआ कि इन दोनों स्टेशनों पर उतरने वाले सैकड़ों यात्रियों को बीच रास्ते में ही ठाकुरगंज स्टेशन पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे यात्रियों के बीच अफरा-तफरी और भारी असंतोष का माहौल देखा गया.
किशनगंज के बजाय पूर्णिया-अररिया होकर चली ट्रेन; सुबह 6:10 बजे पहुंची ठाकुरगंज
रेलवे के आधिकारिक रनिंग स्टेटस और नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्य रेलखंड पर व्यवधान के कारण आपातकालीन निर्णय लिया गया:
- परिवर्तित मार्ग: देवघर से खुली यह एक्सप्रेस ट्रेन कटिहार जंक्शन पहुंचने के बाद अपने नियमित ट्रैक (किशनगंज होकर) के बजाय पूर्णिया जंक्शन, अररिया कोर्ट, फॉरबिसगंज और ठाकुरगंज होते हुए न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) की ओर रवाना हुई.
- ठाकुरगंज में ठहराव: ट्रेन शुक्रवार की सुबह 06:10 बजे ठाकुरगंज स्टेशन पहुंची और महज दो मिनट के तकनीकी ठहराव के बाद 06:12 बजे आगे के लिए प्रस्थान कर गई.
- यात्री सुविधाओं की खुली पोल: इस अचानक हुए डायवर्जन की वजह से जिन यात्रियों ने महीनों पहले किशनगंज या अलुआबाड़ी रोड के लिए कन्फर्म टिकट लिया था, उन्हें ठाकुरगंज में ही अपनी यात्रा समाप्त करनी पड़ी.
बदइंतजामी के बीच छूटा पसीना; बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को झेलनी पड़ी फजीहत
ठाकुरगंज स्टेशन पर उतरे आक्रोशित यात्रियों ने रेलवे प्रशासन के आपातकालीन प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. नियमानुसार जब रेलवे किसी ट्रेन को अचानक डायवर्ट करता है या आंशिक रूप से रद्द करता है, तो यात्रियों को उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए रिफंड या वैकल्पिक बस सेवा की व्यवस्था की जानी चाहिए.
यात्रियों का आरोप है कि ठाकुरगंज स्टेशन पर उतरने के बाद रेलवे का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या वाणिज्यिक कर्मचारी उन्हें गाइड करने के लिए मौजूद नहीं था. भीषण गर्मी और उमस के बीच बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों को भारी-भरकम सामान के साथ स्टेशन से बाहर आना पड़ा. गंतव्य (किशनगंज/अलुआबाड़ी) तक पहुंचने के लिए यात्रियों को स्थानीय ऑटो, टोटो और निजी बसों के संचालकों को तीन से चार गुना अतिरिक्त किराया देकर निजी साधनों का सहारा लेना पड़ा.
“रेलवे ने हमें हमारे हाल पर छोड़ा”; स्थानीय लोगों और यात्रियों ने की बस सेवा की मांग
रेलवे ने बिना किसी पूर्व सूचना के रूट बदल दिया. अगर हमें ठाकुरगंज ही उतरना था तो हमें कटिहार में ही स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई? बीच रास्ते में बिना किसी साधन के छोड़ देना रेल उपभोक्ताओं के साथ सरासर अन्याय है.
इस रेल संकट को लेकर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी रेल प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई है. लोगों का कहना है कि जब तक कटिहार–न्यू जलपाईगुड़ी रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन सामान्य नहीं हो जाता, तब तक रेलवे को डायवर्टेड रूट के प्रमुख स्टेशनों (जैसे ठाकुरगंज) पर अतिरिक्त सहायता काउंटर खोलना चाहिए और फंसे हुए यात्रियों के लिए आपातकालीन सरकारी बसें चलानी चाहिए. यात्रियों ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के महाप्रबंधक और कटिहार के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) से मांग की है कि इस लापरवाही की जांच की जाए और भविष्य में डायवर्जन के दौरान समय रहते डिजिटल माध्यमों से स्पष्ट सूचना प्रसारित की जाए ताकि यात्रियों को अनावश्यक मानसिक और आर्थिक क्षति से बचाया जा सके.
