आर्थिक संकट में घिरे सीमांचल के किसान, कर्ज के बोझ से आत्महत्या की जतायी आशंका
किशनगंज. जिले में बीते 20 मार्च की शाम आए भीषण चक्रवाती तूफान व बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है. इस प्राकृतिक आपदा से मक्का की फसलों को हुए व्यापक नुकसान को लेकर जिला परिषद प्रतिनिधि इमरान आलम ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मुआवजे की गुहार लगायी है. उन्होंने पत्र के माध्यम से सरकार का ध्यान किसानों की दयनीय स्थिति की ओर आकर्षित करते हुए अविलंब राहत राशि उपलब्ध कराने की मांग की है.सीएम को भेजे गए पत्र में इमरान आलम ने कहा है कि वर्तमान में मक्का सीमांचल के किसानों की आय का मुख्य आधार है. भारी निवेश व कड़ी मेहनत के बाद फसल तैयार हो रही थी, लेकिन कुदरत के कहर ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. मक्का की फसल पूरी तरह खेतों में बिछ गयी है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है.
कर्ज के बोझ तले दबे अन्नदाता
जिला परिषद प्रतिनिधि ने आगाह किया है कि जिले के अधिकांश किसानों ने खाद, बीज और कीटनाशकों के लिए भारी कर्ज ले रखा है. फसल बर्बाद होने के कारण अब वे इस कर्ज को चुकाने की स्थिति में नहीं हैं. उन्होंने पत्र में भावुक होते हुए लिखा कि यदि सरकार ने समय रहते सहायता प्रदान नहीं की, तो कर्ज का यह बोझ किसानों को आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर सकता है.
त्वरित सर्वेक्षण की उठी मांग
इमरान आलम ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि किशनगंज जिले के सभी प्रखंडों में कृषि विभाग के माध्यम से फसल क्षति का त्वरित सर्वेक्षण करवाया जाए. उन्होंने अनुरोध किया है कि प्रभावित क्षेत्रों का पारदर्शी तरीके से आकलन कर प्रत्येक पीड़ित किसान को उचित मुआवजा दिलाया जाए, ताकि उन्हें इस गहरे आर्थिक संकट से उबारा जा सके. इस पत्र के बाद अब जिले के किसानों की नजरें सरकारी मदद व प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं.
